दिल्ली दंगे मामले में देवांगाना कलिता को सुप्रीम कोर्ट से झटका, इलेक्ट्रॉनिक सूबत देने को आदेश पर लगाया स्टे

दिल्ली दंगे की आरोपी और पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता देवांगना कलिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें आरोप तय होने से पहले इलेक्ट्रॉनिक सबूत सौंपने का निर्देश दिया गया था.

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देवांगना कलिता को सुप्रीम कोर्ट से झटका. (photo: ITG) देवांगना कलिता को सुप्रीम कोर्ट से झटका. (photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

दिल्ली दंगे मामले में आरोपी पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता देवांगना कलिता को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे लगा दी है, जिसमें आरोप तय होने से पहले अभियोजन पक्ष को इलेक्ट्रॉनिक सबूत सौंपने का निर्देश दिया गया था.  

मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत के जज जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष ASG एस वी राजू ने दलील देते हुए अपने तर्कों के समर्थन में कोर्ट के कई निर्णय और आदेश का हवाला दिया.

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने टिप्पणी की कि आप 10 साल तक अपनी बहस पूरी नहीं करेंगे. फिर आप कहते हैं कि मुकदमे में देरी हो रही है!

सुनवाई में देवांगना कलिता के वकील ने तर्क दिया कि एक वीडियो से ये साफ साबित होगा कि वो केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं और उन्होंने कोई पथराव नहीं किया था. इसी वीडियो के आधार पर उन्हें मुक्त करने की मांग की गई. इस पर अदालत ने साफ कहा कि ये बचाव के लिए बहुत अच्छा तर्क है, लेकिन मुकदमे के इस मौजूदा चरण पर ये बिल्कुल कारगर नहीं है.

बता दें कि देवांगना कलिता 2020 के दिल्ली दंगे मामले में आरोपी हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले उन्हें इलेक्ट्रॉनिक सबूत सौंपने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. आज सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट का ये फैसला दिल्ली दंगे से जुड़े कई मामलों में आरोपी कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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