जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर बंद किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सोमवार को इस मामले के साथ प्रदर्शन के दौरान 'बाहरी लोगों' के घुसने और प्रदर्शनकारियों को परेशान किए जाने के आरोपों से जुड़ी एक अन्य याचिका पर भी मंगलवार को सुनवाई करने की सहमति दी.
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विनोद जाखड़ की याचिका में 10 अक्टूबर को आम प्रदर्शनकारियों पर दिनदहाड़े हुए हमलों की 'निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच' की मांग की गई है. याचिका में दावा किया गया है कि सादे कपड़ों में 'असामाजिक तत्वों' द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और उन्हें पीटे जाने के वीडियो मौजूद हैं.
जंतर-मंतर से जुड़ी याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई की मांग की गई. इस पर पीठ ने कहा कि इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट भी देख रहा है. पीठ ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले को देख रहा है. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है. जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा है, तो हमें देखना होगा कि हम इसे किस हद तक दोबारा देख सकते हैं. इसलिए इसे कल सुनते हैं.' इससे पहले सोमवार को जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया गया. दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश में प्रदर्शन और धरने के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को नए निर्धारित स्थल बनाया है.
विनोद जाखड़ की याचिका में क्या है?
विनोद जाखड़ की जनहित याचिका में कहा गया है कि अगर ऐसी घटनाओं की जांच नहीं की गई, तो अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने की मौलिक स्वतंत्रता के इस्तेमाल पर असर पड़ेगा. याचिका में अधिकारियों को 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और जांच टीम को सौंपने का निर्देश देने की मांग की गई है. इसमें कनॉट प्लेस, इंदिरा चौक, खादी ग्रामोद्योग भवन के बाहर का रास्ता, संसद मार्ग, जनपथ, जंतर-मंतर रोड और राजीव चौक, जनपथ, पटेल 22 चौक और बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशनों के सभी कैमरों की फुटेज शामिल है.
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