'राहुल गांधी के पास कोई जनसमर्थन नहीं, PR से जुटा रहे भीड़', बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर बोला हमला

राहुल गांधी पुणे में सिर्फ महिलाओं के लिए "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम करने जा रहे हैं. इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं से भारतीय महिला होने पर राय मांगी और कुछ जवाब भी साझा किए. वहीं बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि कांग्रेस इस इवेंट में शामिल होने के लिए Gen-Z इन्फ्लुएंसर्स को 25000 रुपये दे रही है. भंडारी ने कहा कि कांग्रेस के पास असली जनसमर्थन नहीं है.

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BJP ने दावा किया कि राहुल के कार्यक्र में शामिल होने के लिए Gen-Z इन्फ्लुएंसर्स को मिल रहे 25 हजार रुपये (Photo: PTI) BJP ने दावा किया कि राहुल के कार्यक्र में शामिल होने के लिए Gen-Z इन्फ्लुएंसर्स को मिल रहे 25 हजार रुपये (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:34 AM IST

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पुणे में अपने कार्यक्रम "छात्रों की गूंज" का अगला संस्करण करने जा रहे हैं, जिसमें सिर्फ महिलाओं को शामिल किया जाएगा. इसी बीच बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बड़ा दावा किया है कि कांग्रेस राहुल गांधी के इस इवेंट में शामिल होने के लिए Gen-Z इन्फ्लुएंसर्स को 25000 रुपये का भुगतान कर रही है. 

भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के पास कोई असली जनसमर्थन नहीं है. उनके मुताबिक कांग्रेस पीआर एजेंसियों और पैसे देकर भीड़ जुटा सकती है, लेकिन देश की जनता का दिल नहीं जीत सकती. 

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भंडारी ने कहा कि भारत का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और उसने 2014, 2019 और 2024 में कांग्रेस और उसके गठबंधन को आईना दिखाया है, और 2029 में भी यही दोहराया जाएगा.

दूसरी तरफ राहुल गांधी ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने महिलाओं से पूछा कि उनके लिए भारतीय महिला होने का क्या मतलब है. उन्होंने बताया कि "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम पुणे में होगा और इसमें सिर्फ महिलाएं शामिल होंगी. गांधी ने कहा कि उनकी टीम की महिलाओं ने पहले खुद इस विषय पर 20 से 30 मिनट की चर्चा तैयार की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि समाज उनके साथ कैसा बर्ताव करता है, क्या अच्छा है और क्या बुरा है.

यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के इवेंट को 30 शर्तें वाली मंजूरी... तस्वीर-पोस्टर-बैनर पर पुणे पुलिस का सख्त निर्देश

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राहुल ने कहा कि यह एक अच्छी कवायद थी, जिससे उन्हें महिलाओं की भावनाओं को समझने में मदद मिली. इसके बाद टीम ने तय किया कि इस चर्चा को सबके लिए खोला जाए और कार्यक्रम में आने वाली महिलाओं से भी उनकी राय पूछी जाए.

गांधी ने कहा कि यह चर्चा जरूरी है कि समाज महिलाओं के साथ क्या करता है, उन पर डर का हथियार कैसे इस्तेमाल होता है, उन्हें किस तरह की हिंसा झेलनी पड़ती है और इससे वे नागरिक के तौर पर खुद को कैसा महसूस करती हैं. उन्होंने कुछ महिलाओं के जवाब भी पढ़कर सुनाए. एक महिला ने लिखा कि उन्हें लगातार चिंता के नाम पर नियंत्रित किया जाता है. एक अन्य जवाब में कहा गया कि पेपर लीक, सस्ती पढ़ाई की कमी या पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से कम उम्र में शादी करा दी जाती है. एक और महिला ने पितृसत्ता, नैतिक निगरानी और अपनी बात कहने पर धमकी मिलने की बात कही.

राहुल ने अपने एक्स पोस्ट में हिंदी में लिखा कि वे जानना चाहते हैं कि महिलाएं भारतीय महिला होने के बारे में क्या महसूस करती हैं, न कि समाज या परिवार क्या सोचता है. उन्होंने महिलाओं से उनके संघर्ष, बाधाएं, नजरिया और सपनों के बारे में पूछा और सबसे ज्यादा जवाब आने का इंतजार जताया.

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