किसान-छात्र और युवा... CJP नेताओं ने राकेश टिकैत से मिलकर बनाया नया प्लान

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने दिल्ली में किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात कर किसानों, छात्रों और युवाओं का संयुक्त मोर्चा बनाने की बात कही. CJP का आरोप है कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को सभी राज्यों में वापस नहीं लिया गया है.

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CJP ने राकेश टिकैत से एक बड़ा समूह बनाने की अपील की है. (Photo- ITG) CJP ने राकेश टिकैत से एक बड़ा समूह बनाने की अपील की है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:33 AM IST

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और संगठन के कई अन्य नेताओं ने दिल्ली में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के वरिष्ठ नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की. इस दौरान किसानों, छात्रों और युवाओं का साझा मोर्चा बनाकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई.

बैठक के बाद आशुतोष रांका ने कहा, "हमें उम्मीद है कि हमारे किसान भाई और इस देश के छात्र और युवा मिलकर मोदी सरकार को चारों तरफ से घेरने का काम करेंगे."

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यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब हाल ही में छात्र आंदोलन स्थगित होने के बाद CJP ने अपने आंदोलन को बड़ा सामाजिक मुद्दों से जोड़ने के संकेत दिए हैं. संगठन का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ अब किसानों और युवाओं के सवालों को भी साझा मंच पर उठाया जाएगा.

सीजेपी ने सरकार पर लगाए आरोप

CJP का आरोप है कि आंदोलन के दौरान केंद्र और कुछ राज्य सरकारों की तरफ से किए गए आश्वासनों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ. संगठन का दावा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों पर दर्ज मामलों में कार्रवाई हुई, लेकिन राजस्थान समेत कुछ राज्यों में अब भी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है.

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राकेश टिकैत से सीजेपी ने मांगा समर्थन

इसी मुद्दे को लेकर CJP नेताओं ने राकेश टिकैत से समर्थन मांगा. संगठन का कहना है कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया, तो किसान संगठनों और युवाओं के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है.

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर चले छात्र आंदोलन के दौरान भी राकेश टिकैत कई बार प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे और छात्रों के समर्थन में बयान दिए थे. अब दोनों पक्षों की यह बैठक छात्र और किसान संगठनों के बीच संभावित संयुक्त अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मानी जा रही है.

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