मध्य प्रदेश में मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सौ फीसदी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है. नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसानों ने राजधानी भोपाल के लिए पैदल और ट्रैक्टर मार्च शुरू कर दिया है. भोपाल-नागपुर नेशनल हाईवे पर उग्र हुए किसानों ने लगाई गई पहली और दूसरी बैरिकेडिंग को ध्वस्त कर दिया और भोपाल की सीमा की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं. किसान मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलकर अपनी समस्याएं रखना चाहते हैं.
किसान संगठनों के अनुसार, राज्य सरकार की मौजूदा खरीदी नीति से उन्हें प्रति क्विंटल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ सिर्फ 1 क्विंटल 20 किलो मूंग खरीदने की ही सीमा तय की है. किसानों के मुताबिक, 1 एकड़ खेत में औसतन 4 से 5 क्विंटल मूंग की पैदावार होती है. सरकार ने मूंग की MSP 8 हजार 668 रुपये प्रति क्विंटल रखी है.
खुले बाजार में नुकसान
कोटा सीमा तय होने के कारण किसानों को बची हुई 3 से 4 क्विंटल मूंग खुले बाजार में मजबूरीवश 4000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है. इससे किसानों को हर क्विंटल मूंग पर 3000 से 4000 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है. देखें VIDEO:-
हनुमान चालीसा पाठ से शुरुआत
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर धरना देकर और हनुमान चालीसा का पाठ करके इस मार्च का आगाज किया. हाथों में तिरंगा लिए और 'जय जवान, जय किसान' के नारे लगाते हुए किसान देर शाम सीहोर जिले के बुधनी पहुंचे.
रास्ते में ट्रॉली बनी घर
प्रशासन की तरफ से DM सोमेश मिश्रा और SP साईकृष्ण एस. थोटा ने नेशनल हाईवे पर किसानों को समझाने और रोकने की कोशिश की, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही. किसान रास्ते में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लाए गए खाने के पैकेट खाकर आगे बढ़ रहे हैं. ट्रॉलियों में ही गद्दे और बिस्तर लगाए गए हैं.
किसानों का साफ कहना है, जहां पुलिस रोकेगी या रात होगी, वहीं ट्रॉली में सो जाएंगे, लेकिन मांग पूरी हुए बिना वापस नहीं लौटेंगे. इस आंदोलन और रूट डायवर्जन के कारण भोपाल-नागपुर मार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आम यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
रवीश पाल सिंह