छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के गांव धोंधा में नदी पर बना पुल भारी बारिश में बह गया. इस पुल की लागत 10 करोड़ बताई जा रही है. गुरुवार को राज्य में भारी बारिश हुई, रात भर बारिश जारी रही. सुबह लोगों की जब आंख खुली तो उन्होंने देखा कि नदी पर बना पुल बह चुका था.
पुल निर्माण के समय से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. पुल पर कहीं-कहीं दरारें भी देखने को मिल रही थी. यह पुल गांव वालों की आवाजाही का साधन था, अब पुल के बह जाने से ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. गांव वालों ने पुल निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पुल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था.
शुक्रवार को ग्रामीणों को पुल बहा दिखा. कहीं पिलर उखड़े पड़े थे, कहीं स्लैब पानी में समा गई थी और पुल का लंबा हिस्सा नदी की धार में बह चुका था. लोगों द्वारा निर्माण एजेंसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि पुल निर्माण में खराब सामग्री का इस्तेमाल किया गया जिसके कारण पुल कमजोर हो गया था.
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ग्रामीणों का कहना है कि पुल की नींव सिर्फ कागजों पर मजबूत थी, असल में नहीं. पुल बहने के कारण कई गांव वालों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी नदी के आसपास रहने वालों को हो रही है.
पुल बहने के बाद प्रतातपुर क्षेत्र में सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों में निर्माण की बजाय कागजी प्रक्रिया को ज्यादा महत्व दिया गया. ग्रमाणों ने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग शुरू कर दी है. उनकी मांग है कि जम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो.
ग्रामीणों का कहना है कि 10 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण हुआ था, फिर भी पुल बह गया. ऐसे में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए.
सुमित सिंह