अक्टूबर को दूसरा सप्ताह बीतते उत्तर और मध्य भारत के ज्यादातर इलाकों में धान कटाई का मौसम आ गया है. इसके साथ ही सीजन में पराली जलाने के मामले और उससे होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर की चिंता भी बढ़ गई है.
केंद्र सरकार ने पराली फसल अवशेष प्रबंधन को मिशन मोड में अमलीजामा पहनाने के लिए कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इस बैठक में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की मौजूद थे.
इस बैठक में दिल्ली-एनसीआर सहित प्रमुख राज्यों- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्रीगण, केंद्रीय कृषि सचिव समेत राज्यों के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.
जमीनी स्तर पर काम करने पर जोर
बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि फसल कटाई और रबी बुवाई के बीच समय बहुत कम बचा है. इसीलिए प्रशासनिक अमले को फाइलों से निकलकर सीधे जमीन पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा. जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की त्वरित बैठकें आयोजित कर सख्त निगरानी और व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं.
'पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा'
बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धान की कटाई चल रही है और किसान को अगली फसल की बुवाई की जल्दी है. ऐसे में सिर्फ ये कह देना कि पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा. हमें किसान को आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना होगा. पराली जलाने से न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व जलकर राख हो जाते हैं.
उन्होंने कहा कि हमें अपनी धरती माता और मिट्टी की सेहत को बचाना है. पराली खेत में मिले तो जैविक खाद बनती है और खेत से बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनती है.
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ पराली की आग रोकना नहीं, बल्कि एक ऐसा पावरफुल सिस्टम बनाना है जिससे किसान को पराली जलाने की जरूरत ही न पड़े. इसके साथ ही पर्यावरण के मुताबिक खेती के जरिए कार्बन क्रेडिट जैसी संभावनाओं का फायदा भी अन्नदाताओं को मिले.
मध्य प्रदेश और राजस्थान में घटनाओं पर चिंता
शिवराज चौहान ने बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के विश्लेषण पर भी बात की. उन्होंने कहा कि संतोष की बात है कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर की अवधि में पिछले साल की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3% और उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की कमी आई है. साथ ही पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई है.
लेकिन, मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 (452% की बढ़ोतरी) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 (200% की बढ़ोतरी) होना चिंता की बात है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने इन दोनों राज्यों को आगाह करते हुए कहा कि प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तुरंत विशेष कार्ययोजना लागू की जाए.
उन्होंने कहा कि क्योंकि अभी कटाई का एक बड़ा हिस्सा बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वो भी कतई ढिलाई न बरतें और पूरी सतर्कता रखें.
मशीनों का शत-प्रतिशत इस्तेमाल हो, पुरानी मशीनें बंद न पड़ें
केंद्रीय मंत्री चौहान ने मशीनों की कार्यशीलता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें मुहैया करा चुकी हैं और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 और नई मशीनें दी गई हैं. लेकिन केंद्रीय सर्वेक्षण में ये सामने आया है कि पंजाब में लगभग 40% और हरियाणा में 48% पुरानी मशीनें बंद या गैर-कार्यशील पाई गई हैं.
चौहान ने निर्देश दिए कि नई मशीनें बांटने के साथ-साथ पुरानी बंद पड़ी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराकर उन्हें चालू किया जाए, वरना मशीनों की कमी का संकट खड़ा हो जाएगा. उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) को सक्रिय करने पर जोर देते हुए कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को हर हाल में सस्ती दरों पर मशीनें दी जाए.
केंद्र से भरपूर आर्थिक मदद; पंजाब जल्द भेजे यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट
फंड्स की उपलब्धता का जिक्र करते हुए बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत साल 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है. इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़, हरियाणा को 1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपए शामिल हैं.
चालू वर्ष 2026-27 के लिए भी 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन तय कर 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. हालांकि, आवंटित राशि के धीमे उपयोग पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किसान को समय पर साधन मिलने चाहिए. खासतौर से पंजाब सरकार से अपील की गई कि वो पूर्व में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) तुरंत केंद्र को भेजे, ताकि योजना की अगली किस्त बिना किसी रुकावट के तुरंत जारी की जा सके.
सूखे क्षेत्रों में पराली चारे का बने सहारा, उद्योगों से सीधे जुड़ें किसान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है, वहां पराली को चारे के रूप में सुरक्षित संग्रहित कर मवेशियों तक पहुंचाया जाए. इसके साथ ही, थर्मल पावर प्लांट्स में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और 2G बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी सप्लाई चेन जोड़ी जाए.
उन्होंने राज्यों से कहा कि स्वीकृत आपूर्ति परियोजनाओं को बिना देरी के धरातल पर शुरू कराया जाए. पूसा-44 जैसी ज्यादा समय लेने वाली किस्मों की जगह पर कम अवधि वाली उन्नत किस्मों (जैसे पूसा 2090, PR126 आदि) को बढ़ावा दिया जाए ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का पर्याप्त समय मिल सके.
राज्यों को हरसंभव सहायता का भरोसा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है, लेकिन केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चे पर हर कदम पर राज्यों और अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.
उन्होंने सभी भागीदार मंत्रालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और जिला प्रशासनों से आह्वान किया कि वो इसे एक साझा राष्ट्रीय संकल्प मानकर काम करें, ताकि हमारे खेत प्रदूषणमुक्त और किसान खुशहाल बन सकें.
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दोपहर 3 बजे के बाद सैटेलाइट गैप पर सख्त निगरानी के निर्देश: भूपेंद्र यादव
बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों के साथ समन्वय की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उपग्रह निगरानी में दोपहर 3 बजे के बाद आने वाले अंतराल के दौरान ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के जरिए पराली जलाने पर सख्त निगरानी रखी जाए.
आशुतोष मिश्रा