'SIR के लिए 12वां दस्तावेज होगा आधार...', चुनाव आयोग को SC का सख्त आदेश

बिहार में मतदाता सूची संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने पर गंभीर बहस हुई. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल करने की मान्यता दे दी है. हालांकि, अधिकारियों को आधार कार्ड की प्रामाणिकता और सही होने की तसदीक करने का अधिकार होगा. 

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आधार को पहचान पत्र मानने पर सुप्रीम कोर्ट में हुई ज़ोरदार बहस (File Photo: PTI) आधार को पहचान पत्र मानने पर सुप्रीम कोर्ट में हुई ज़ोरदार बहस (File Photo: PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को 11 मान्य दस्तावेजों के बराबर पहचान प्रमाण के तौर पर माना जाएगा. यानी इसे 12वें दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाएगा. अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि आधार केवल पहचान के लिए मान्य होगा, निवास या नागरिकता का प्रमाण नहीं. हालांकि यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अधिकारियों को आधार कार्ड की प्रामाणिकता और सही होने की पुष्टि करने का अधिकार होगा. 

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सिब्बल की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि BLO नागरिकता तय नहीं करते. इसलिए आधार को पहचान के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए, ताकि योग्य मतदाताओं को वोट का अधिकार मिल सके. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के बावजूद BLO केवल 11 दस्तावेज़ों को ही मान रहे हैं और आदेश की अवमानना कर रहे हैं.

चुनाव आयोग का पक्ष

निर्वाचन आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.6 फीसदी लोगों ने आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं. केवल 65 लाख लोगों ने आधार दिया है. आयोग ने स्वीकार किया कि आधार को डिजिटल रूप से अपलोड किया जा सकता है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है. आयोग ने यह भी कहा कि 0.3 फीसदी लोग अवैध प्रवासी पाए गए, जिन्हें लिस्ट में शामिल करना संभव नहीं.

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जजों की टिप्पणियां

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कानून साफ है—आधार एक आधिकारिक दस्तावेज़ है. आयोग इसे शामिल करेगा और इसकी सत्यता की जांच करेगा.

जस्टिस बागची ने कहा कि पासपोर्ट और जन्म प्रमाणपत्र के अलावा कोई दस्तावेज़ निर्णायक नागरिकता प्रमाण नहीं है. आधार को पहचान के तौर पर शामिल करना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: 'आइडिया सही, लेकिन टाइमिंग...', बिहार SIR पर क्या बोले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सिर्फ आधार कार्ड के साथ आवेदन करता है, तो आयोग उसकी गुणवत्ता और वास्तविकता की जांच कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाए. इसे केवल पहचान स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाएगा. नागरिकता या निवास का प्रमाण मानने से इंकार.

निर्वाचन आयोग को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करने होंगे, ताकि नीचे तक जानकारी सही तरीके से पहुंचे.

इस फैसले के बाद बिहार में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में बड़ी स्पष्टता आ गई है. अब आधार को भी पहचान के तौर पर शामिल किया जाएगा, जिससे लाखों मतदाताओं को राहत मिल सकती है.

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