लद्दाख के लोगों के लिए बड़ी खबर, हाईकोर्ट की स्थायी बेंच का उद्घाटन आज

लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की स्थायी पीठ का उद्घाटन रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत करेंगे. इससे लद्दाख के लोगों को न्याय पाने के लिए श्रीनगर या जम्मू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत. (Photo: ITG) भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लेह ,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत रविवार को लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ (बेंच) का उद्घाटन करेंगे. एक एजेंसी के मुताबिक लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे केंद्र शासित प्रदेश के लोगों को न्याय उनके करीब मिल सकेगा.

शनिवार को उन्होंने कहा, "उच्च न्यायालय की पीठ की स्थापना लद्दाख के लिए एक अहम घटनाक्रम है. खासकर उन लोगों के लिए जो दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं, जिन्हें भौगोलिक बाधाओं, खराब मौसम और लंबी दूरी के कारण उच्च न्यायिक संस्थानों तक पहुंचने में लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था."

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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी होंगे शामिल
कुंद्रा ने आगे कहा, "यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है. अगर हम पिछले 40 वर्षों में भारत के उच्च न्यायालयों के इतिहास को देखें, तो मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य उच्च न्यायालय के लिए इस तरह से कोई स्थायी पीठ स्थापित की गई है."

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में गुवाहाटी उच्च न्यायालय की पीठ का उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में ग्वालियर में भी ऐसी पीठें स्थापित की गई थीं. वहां के निवासियों को मिलने वाले व्यावहारिक लाभों पर जोर देते हुए कुंद्रा ने कहा कि जो लोग न्यायिक राहत चाहते हैं (जिसमें रिट याचिकाएं भी शामिल हैं), उन्हें अब ऐसी कानूनी कार्यवाही के लिए श्रीनगर या जम्मू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

उन्होंने कहा, "लोगों के करीब न्याय पहुंचाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। वरना, जिसे भी कोई शिकायत होती और जो रिट याचिका दायर करना चाहता, उसे श्रीनगर या जम्मू जाना पड़ता. अब लेह में ऐसा संभव हो गया है, जो कि एक बेहद सकारात्मक बदलाव है."

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लोगों के घरों तक न्याय पहुंचाना बहुत जरूरी: कुंद्रा
कुंद्रा ने बताया कि यह पहल महज दो महीने के भीतर पूरी हो गई, जबकि केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे लद्दाख के प्रतिनिधियों की मांगों में भी यह शामिल नहीं थी. "बल्कि, यह भारत सरकार की ओर से उठाया गया एकतरफा कदम है, जो यहां के कठिन भौगोलिक हालात और लोगों के रहन-सहन की परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों को अच्छी तरह समझती है.

उन्होंने कहा, "सरकार इस बात को मानती है कि लोगों के घर के करीब तक न्याय पहुंचाना बहुत ज़रूरी है." 5 सितंबर को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की एक स्थायी पीठ (बेंच) स्थापित करने से जुड़ा नियम लागू हो गया. यह नियम 27 अगस्त को भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया था. इसमें यह प्रावधान था कि यह नियम उस तारीख से लागू होगा, जिसे प्रशासक द्वारा आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में अधिसूचना के ज़रिए तय किया जाएगा.

इसके अनुसार उपराज्यपाल ने इस नियम को लागू करने के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की. सक्सेना ने इस कदम को न्याय प्रणाली को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक "ऐतिहासिक कदम" बताया. साथ ही, उन्होंने लद्दाख में न्यायिक व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री शाह का आभार व्यक्त किया."

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