अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बुधवार को चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. मामले में कुल 8 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है. चार्जशीट करीब 74 हजार पन्नों की है.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बुधवार को पुलिस ने एंटी करप्शन कोर्ट में जेल में बंद सभी आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी. चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं की ओर से विरोध और आपत्तियों का दौर शुरू हो गया. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के पैनल ने चार्जशीट और विवेचना के विभिन्न पहलुओं पर करीब 70 मिनट तक मंथन किया .
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की भूमिका को लेकर पहले जांच की मांग की गई थी, उन्हें आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने चार्जशीट में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन समेत कुछ नामों को गवाह बनाए जाने पर सवाल उठाए. हालांकि, इन दावों के संबंध में गवाहों की पूरी सूची अधिवक्ताओं द्वारा स्वयं देखे जाने की बात भी स्पष्ट नहीं है.
विवेचना के विभिन्न पहलुओं पर 70 मिनट मंथन
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बुधवार को पुलिस ने एंटी करप्शन कोर्ट में जेल में बंद सभी आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी. चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं की ओर से विरोध और आपत्तियों का दौर शुरू हो गया. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के पैनल ने चार्जशीट और विवेचना के विभिन्न पहलुओं पर करीब 70 मिनट तक मंथन किया .
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की भूमिका को लेकर पहले जांच की मांग की गई थी, उन्हें आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने चार्जशीट में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन समेत कुछ नामों को गवाह बनाए जाने पर सवाल उठाए. हालांकि, इन दावों के संबंध में गवाहों की पूरी सूची अधिवक्ताओं द्वारा स्वयं देखे जाने की बात भी स्पष्ट नहीं है.
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता कुल शेखर सिंह के मुताबिक, विवेचक ने 59 पन्नों की मुख्य चार्जशीट दाखिल की है. इसमें 133 गवाहों का उल्लेख है. इसके साथ बड़ी संख्या में दस्तावेज और करीब 101 सीडी केस का हिस्सा हैं. वहीं, चार्जशीट से जुड़े दस्तावेजों और केस डायरी को मिलाकर पन्नों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं.
कुछ धाराओं में बदलाव का दावा
अभियोजन पक्ष वकील कुल शेखर सिंह के मुताबिक, चार्जशीट में आईपीसी की धारा 305 और 306 को हटा दिया गया है. वहीं सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के मामले में धारा 317(2) हटाए जाने की बात कही गई है. बाकी आरोपियों पर बरामदगी के आधार पर धारा 317(2) लगाए जाने की जानकारी दी गई है. इसके अलावा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) और 13(2) भी लगाई गई हैं. अभियोजन पक्ष का कहना है कि विवेचना में संबंधित लोगों को पब्लिक सर्वेंट मानते हुए गबन से जुड़ा मामला माना गया है. हालांकि अभियोजन पक्ष के वकील कुल शेखर सिंह की ओर से ही इन धाराओं के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि मामले में कोई पब्लिक सर्वेंट नहीं है.
जिन्हें आरोपी बनाना चाहिए था, उन्हें गवाह बना दिया- बार अध्यक्ष
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने चार्जशीट में ट्रस्ट से जुड़े लोगों को गवाह बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की ओर से जिन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी, उनकी जांच के बजाय उन्हें गवाह बनाया गया है. उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की टीम में आपराधिक मामलों के अनुभवी अधिवक्ता शामिल थे और उन्होंने चार्जशीट को लेकर अपने तर्क रखे. उनके मुताबिक, इन तर्कों का सरकारी अधिवक्ता और क्षेत्राधिकारी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया.
बरामदगी और केस प्रॉपर्टी पर भी सवाल
अधिवक्ताओं ने मामले में कथित चोरी की रकम, बरामदगी और केस प्रॉपर्टी को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि चोरी की रकम का स्पष्ट हिसाब और बरामदगी से जुड़ी परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जांच में शामिल एजेंसियों की भूमिका और विवेचना की दिशा पर सवाल उठाने वाले कई बिंदु हैं.
उनका दावा है कि मामले की विवेचना निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने के बजाय कुछ आरोपियों को राहत देने की दिशा में गई. हालांकि, ये सभी आरोप अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इन पर अंतिम निर्णय अदालत के समक्ष साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा.
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और टीनू यादव की जमानत पर 24 सितंबर को सुनवाई
इसी बीच राम मंदिर ट्रस्ट के गणना प्रमुख रहे सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और आरोपी टीनू यादव की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के विरोध और प्रदर्शन के चलते सुनवाई टल गई. अब दोनों की जमानत याचिकाओं पर 24 सितंबर को सुनवाई होगी.
मामले में पहले ही छह अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आगे की कानूनी प्रक्रिया में दोबारा जमानत याचिका दाखिल किए जाने के बाद जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है.
अब अदालत में तय होगा विवेचना और आरोपों का कानूनी आधार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट दाखिल होने के साथ अब जांच का अगला चरण न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में पहुंच गया है. एक ओर अभियोजन पक्ष चार्जशीट, गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने विवेचना और कुछ लोगों को गवाह बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं. अब अदालत में चार्जशीट, साक्ष्यों, गवाहों और लगाए गए आरोपों की कानूनी कसौटी पर जांच होगी. इसी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन के आरोपों का आधार कितना मजबूत है और अधिवक्ताओं की आपत्तियों पर अदालत का क्या रुख रहता है.
मयंक शुक्ला / अरविंद ओझा