असम सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इसके नियम तैयार करने के लिए एक समिति बनाई है. राजनीतिक विभाग ने मामले की जानकारी दी. 8 सदस्यों वाली यह समिति एक महीने के भीतर नियमों का मसौदा सौंपेगी. 27 मई को असम विधानसभा ने 'समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक' पारित किया था.
इस विधेयक में धर्म की परवाह किए बिना शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिश्तों से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा बनाने का प्रस्ताव है. इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है. गृह और राजनीतिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय तिवारी ने 13 अक्टूबर के आदेश में यह जानकारी दी, जो कि गुरुवार को मीडिया के लिए उपलब्ध कराया गया.
आदेश के मुताबिक, गृह और राजनीतिक विभाग के सचिव देबा प्रसाद मिश्रा नियमों का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष होंगे. समिति में वित्त विभाग के विशेष आयुक्त और सचिव पार्थ प्रतिम मजूमदार, विधायी सचिव गीतांजलि डी सैकिया, अल्पसंख्यक कल्याण और विकास विभाग की सचिव फरीदा समसुल और गृह एवं राजनीतिक विभाग के अतिरिक्त सचिव मृदुल केआर दास शामिल हैं.
शादी और लिव-इन रिश्तों पर विधेयक
असम सरकार यह विधेयक एक से ज्यादा शादी पर रोक लगाने और लिव-इन रिश्तों का रजिस्ट्रेश जरूरी बनाने के लिए लाई थी. विधेयक में इन प्रावधानों का पालन नहीं करने पर सजा का प्रस्ताव भी रखा गया है. साथ ही दो- या एक से ज्यादा शादी करने पर सात साल की जेल का प्रस्ताव है. वहीं, लिव-इन रिश्ते का रजिस्ट्रेशन ना कराने पर तीन महीने की जेल का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.
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हालांकि, यह विधेयक असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं होगा. मई में उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बना था.
अब राज्य सरकार की 8 सदस्यीय समिति एक महीने में नियमों का खाका तैयार करेगी. दूसरी ओर, विधानसभा से पारित विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जा चुका है.
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