असम के मानस नेशनल पार्क में फूलों के पौधे की एक नई प्रजाति की पहचान की गई है. इसका नाम Osbeckia Assamensis रखा गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर इसकी फोटो शेयर कर यह जानकारी दी. राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच किए गए फील्ड सर्वे के दौरान यह पौधा पार्क के घास के मैदानों में अलग-अलग स्थानों पर मिला था.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लिखा, ''यह 'ओस्बेकिया असामेंसिस' (Osbeckia Assamensis) है - फूलों की एक नई प्रजाति, जिसे असम के मानस नेशनल पार्क में खोजा गया है. अगर आप मुझे फॉलो करते हैं, तो आपने देखा होगा कि मैं अक्सर हमारे राज्य में पौधों, फूलों और जानवरों की नई प्रजातियों के खोजे जाने की खबरें साझा करता रहता हूं. हमारी सरकार, जो हमारे समाज का ही एक हिस्सा है, हमेशा से प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देती आई है. ये खोजें इस बात का प्रमाण हैं कि हम इस क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं.''
2.5 मीटर तक ऊंची होती है झाड़ी
Osbeckia assamensis मेलास्टोमेटेसी (Melastomataceae) परिवार से संबंधित एक बारहमासी झाड़ी है. यह 2 से 2.5 मीटर तक ऊंची हो सकती है. इसमें लगभग 3 से 3.5 सेंटीमीटर आकार के गुलाबी फूल आते हैं. फूलों के प्रत्येक गुच्छे में करीब 30 से 35 फूल होते हैं.
मंत्री के मुताबिक, इस पौधे में सितंबर से फरवरी के बीच फूल और फल आते हैं. इससे इन महीनों में पार्क के प्राकृतिक परिदृश्य में रंग दिखाई देते हैं.
2021 से 2025 के बीच हुआ फील्ड सर्वे
जयंत मल्लाबरुआ ने बताया कि शोधकर्ताओं बरनाली दास और नमिता नाथ ने इस प्रजाति का वैज्ञानिक विवरण तैयार किया है. उनका अध्ययन 22 अक्टूबर को वनस्पति विज्ञान की पत्रिका Phytotaxa में प्रकाशित हुआ.
पौधे का पहला नमूना 8 अक्टूबर 2022 को मानस नेशनल पार्क में एकत्र किया गया था. इसके बाद अक्टूबर 2025 में एक और नमूना दर्ज किया गया.
शोधकर्ताओं ने पौधे की शारीरिक विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन किया और उससे मिलती-जुलती प्रजातियों के साथ तुलना की. इसके आधार पर इसकी अलग पहचान स्थापित की गई.
जैव विविधता के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में पौधों, फूलों और जानवरों की नई प्रजातियों की खोज प्रकृति संरक्षण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है.
वहीं, पर्यावरण एवं वन मंत्री ने कहा कि इस प्रजाति की वैज्ञानिक पहचान असम की प्राकृतिक विरासत और मानस नेशनल पार्क की वनस्पति विविधता को समझने की दिशा में अहम है.
मंत्री के अनुसार, मानस के जंगलों और घास के मैदानों में अभी भी ऐसी वनस्पति संपदा मौजूद है, जिसकी वैज्ञानिक पहचान की जानी बाकी है. संरक्षण और वैज्ञानिक शोध के जरिए इस प्राकृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझने और सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
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