अन्ना हजारे ने नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर आजतक से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान जब उनसे सवाल पूछा गया कि उनके आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था और क्या वर्तमान छात्र आंदोलन से भी ऐसी किसी राजनीतिक पार्टी का जन्म हो सकता है, तो वो नाराज हो गए.
अन्ना हजारे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वो इस बारे में कुछ नहीं जानते और इसके बाद वह बीच में ही इंटरव्यू छोड़कर उठ खड़े हो गए.
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने छात्रों के मुद्दे को लेकर पीएम मोदी को लिखे पत्र को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि हिंसा से कभी समाधान नहीं निकलता और नरेंद्र मोदी देश के एक बड़े, सम्मानित नेता हैं. उन्हें ये समझना चाहिए कि हिंसा कोई रास्ता नहीं है. वो सर्वोच्च पद पर हैं, इसलिए मैंने उन्हें पत्र लिखा.
उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में 22 आंदोलन किए, लेकिन उनमें कभी हिंसा नहीं हुई. इस आंदोलन में जो हुआ, वह गलत हुआ. आंदोलन हमेशा अहिंसा के मार्ग पर होना चाहिए.
अन्ना हजारे ने पीएम को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि दिल्ली में छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की कार्रवाई बेहद दुखद थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय "बातचीत" हमेशा बेहतर होती है. लोकतंत्र में टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के लाखों युवा बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान हैं, जिसे केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानने के बजाय जनता के आक्रोश के रूप में देखा जाना चाहिए.
अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए लिखा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार सत्ता नहीं खोती है. इससे बल्कि अन्य मंत्रियों के बीच एक कड़ा और स्पष्ट संदेश जाता है कि जिम्मेदारी न निभाने पर पद छोड़ना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों की अंतिम जवाबदेही तय होनी चाहिए.
ओमकार