केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 और 22 अगस्त को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरे का सबसे अहम फोकस देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन को मजबूत करना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना होगा.
गृह मंत्री सिलीगुड़ी में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें सीमा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की जाएगी. गृह मंत्री के इस दौरे को रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील इलाका है. यही संकरा गलियारा देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है. ऐसे में यहां सीमा सुरक्षा, निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.
कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन
गृह मंत्री अपने दौरे के पहले दिन सीमा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इस दौरान सीमा सुरक्षा को मजबूत करने वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और कई परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने का कार्यक्रम है.
इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना, सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. सरकार लगातार देश की सीमाओं पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है.
गृह मंत्री अपने दौरे के दौरान सशस्त्र सीमा बल यानी SSB के जवानों से भी मुलाकात करेंगे. SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है.
अधिकारियों के मुताबिक, जवानों के साथ बातचीत के दौरान सीमा पर आने वाली चुनौतियों, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर फोकस
SSB भारत-नेपाल की करीब 1,751 किलोमीटर लंबी और भारत-भूटान की करीब 699 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा करता है. दोनों सीमाएं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और सिलीगुड़ी क्षेत्र इन सीमाओं के व्यापक सुरक्षा नेटवर्क का अहम हिस्सा है. भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर सुरक्षा की चुनौती अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से कुछ अलग है. इन सीमाओं पर लोगों की आवाजाही, भौगोलिक परिस्थितियां और खुली सीमा की प्रकृति सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलग तरह की चुनौतियां पैदा करती हैं. ऐसे में इंटेलिजेंस इनपुट, स्थानीय स्तर पर समन्वय, निगरानी और तकनीकी संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
अमित शाह की SSB जवानों के साथ मुलाकात में इन मुद्दों पर जमीनी स्तर की जानकारी हासिल करने की भी कोशिश होगी. गृह मंत्री सीधे सुरक्षा बलों के जवानों और अधिकारियों से ऑपरेशनल चुनौतियों को समझेंगे.
‘चिकन नेक’ पर क्यों है इतनी नजर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आम बोलचाल में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है. ये भारत के नक्शे में एक संकरा भू-भाग है जो देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. इसकी रणनीतिक स्थिति इसे देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल करती है. ये कॉरिडोर लगभग 60 किलोमीटर लंबा और करीब 22 किलोमीटर तक चौड़ा बताया जाता है. इसके आसपास भारत की कई अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं. एक तरफ बांग्लादेश, दूसरी तरफ नेपाल और भूटान तथा उत्तर में तिब्बत क्षेत्र है. इस वजह से सिलीगुड़ी कॉरिडोर का महत्व केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि ये पूरे पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. पूर्वोत्तर के आठ राज्यों तक सड़क और रेल संपर्क के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. किसी भी आपात स्थिति में इस कॉरिडोर की सुरक्षा और निर्बाध कनेक्टिविटी बेहद अहम हो जाती है.
यही कारण है कि केंद्र सरकार यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा दोनों को लेकर लगातार समीक्षा करती रही है. अमित शाह की बैठक में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं.
हाईलेवल बॉर्डर सिक्योरिटी मीटिंग
अमित शाह 22 अगस्त की सुबह सिलीगुड़ी में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी. बैठक में सीमा सुरक्षा बलों के साथ-साथ गृह मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे.
अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने के अलावा सीमा से जुड़े मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सुरक्षा पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की जा सकती है.
बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक महेश दीक्षित समेत गृह मंत्रालय और पश्चिम बंगाल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है.
इस बैठक का एक बड़ा उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम कॉर्डिनेशन को और बेहतर करना हो सकता है. सीमा सुरक्षा अब केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है. ड्रोन, सेंसर, कैमरा, कम्युनिकेशन सिस्टम, इंटेलिजेंस शेयरिंग और डेटा आधारित निगरानी जैसे तकनीकी माध्यम भी बॉर्डर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा बन चुके हैं.
बांग्लादेश सीमा के संदर्भ में अहम है दौरा
अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा और बॉर्डर मैनेजमेंट लगातार केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है. पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. इसके अलावा राज्य का उत्तरी हिस्सा नेपाल और भूटान की सीमाओं के करीब है.
इस लिहाज से सिलीगुड़ी में होने वाली बैठक का दायरा केवल भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा तक सीमित नहीं माना जा सकता. पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है.
केंद्र सरकार की रणनीति अब सीमा सुरक्षा को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी मॉडल के तहत मजबूत करने की है. इसमें भौतिक सुरक्षा के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, बेहतर सड़क और संचार नेटवर्क, इंटेलिजेंस इनपुट और एजेंसियों के बीच तत्काल सूचना साझा करना शामिल है.
नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी
अमित शाह के दौरे का एजेंडा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. वह सिलीगुड़ी में तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे.
इन तीन कानूनों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) शामिल हैं. इन कानूनों ने औपनिवेशिक दौर से चले आ रहे पुराने आपराधिक कानूनों की जगह ली है और एक जुलाई 2024 से लागू हुए हैं.
प्रदर्शनी के जरिए नए कानूनों के प्रमुख प्रावधानों और उनके महत्व की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. केंद्र सरकार देशभर में इन कानूनों को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस, जांच एजेंसियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को इनके प्रावधानों की जानकारी हो.
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ेगा तालमेल
अमित शाह की बैठक का एक अहम पहलू विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भी होगा. सीमा सुरक्षा की चुनौती अब बहुआयामी हो चुकी है. पारंपरिक घुसपैठ और तस्करी के साथ ड्रोन, अवैध नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज, संगठित अपराध और सीमा पार से संचालित गतिविधियां भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती हैं. ऐसे में बॉर्डर गार्डिंग फोर्स, इंटेलिजेंस एजेंसियों, स्थानीय पुलिस, प्रशासन और गृह मंत्रालय के बीच लगातार बेहतर तालमेल जरूरी है. सिलीगुड़ी जैसे रणनीतिक इलाके में ये समन्वय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
गृह मंत्री की बैठक में सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदा तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है.
टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर
मोदी सरकार की बॉर्डर मैनेजमेंट नीति में पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को प्रमुख स्थान मिला है. सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल, फेंसिंग, निगरानी सिस्टम और संचार व्यवस्था को मजबूत करने के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा संबंध सुरक्षा से है. मजबूत सड़क और संचार नेटवर्क न केवल आम लोगों की कनेक्टिविटी बेहतर करते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों की तेज आवाजाही और लॉजिस्टिक सपोर्ट में भी मदद करते हैं.
अमित शाह के दौरे के दौरान जिन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास होगा, उन्हें इसी व्यापक बॉर्डर सिक्योरिटी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है.
क्यों महत्वपूर्ण है का सिलीगुड़ी दौरा?
अमित शाह का ये दौरा कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है. एक तरफ भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे SSB की तैयारियों की समीक्षा होगी. वहीं, दूसरी तरफ रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रहेगी. इसके अलावा बांग्लादेश सीमा से जुड़े व्यापक सुरक्षा परिदृश्य, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और सीमा क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति भी इस दौरे को महत्वपूर्ण बनाती है. कुल मिलाकर अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा ‘बॉर्डर सिक्योरिटी, बेहतर कॉर्डिनेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ की केंद्र सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. 22 अगस्त की हाईलेवल बैठक में सामने आने वाले फैसले और दिशा-निर्देश ये संकेत देंगे कि आने वाले वक्त में भारत अपने पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को किस तरह और मजबूत करेगा.
जितेंद्र बहादुर सिंह