इधर ECI पर विवाद... उधर SIR के खिलाफ महाराष्ट्र में बवाल, बॉम्बे HC में दो याचिका दाखिल

महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट और कोल्हापुर बेंच में दो याचिकाएं दाखिल हुई हैं. पहली याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को चुनौती दी गई है, साथ ही दो इलेक्शन कमिश्नरों की आपत्तियों का जिक्र है. दूसरी याचिका में बूथ अधिकारियों की मनमानी और बिना सुनवाई वोटर हटाने का आरोप है.

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SIR की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं (File Photo: ITG) SIR की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं (File Photo: ITG)

विद्या

  • मुंबई, महाराष्ट्र,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया अब कानूनी विवाद में फंस गई है. इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं. याचिकाओं में वोटर लिस्ट से मनमाने तरीके से नाम हटाने, प्रक्रिया में गड़बड़ी और चुनाव आयोग के अंदर मतभेद जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

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कोल्हापुर बेंच में दाखिल पहली याचिका तीन स्थानीय निवासियों ने वकील असीम सरोदे की टीम के जरिए दायर की है. इसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार वोटर हटाने, डेटाबेस एक्सेस, सॉफ्टवेयर में रुकावट और फॉर्म 6 में जुलाई महीने में हुए बदलावों पर आपत्ति जताई थी. याचिका में इसे CEC और Other ECs Act, 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है.

दूसरी याचिका मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी ने दाखिल की है. इसे वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पेश कर रहे हैं.

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यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के ADR फैसले का हवाला देते हुए दावा करती है कि बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहचान पत्र मांग रहे हैं, जो चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है. साथ ही जो वोटर घर पर नहीं मिले, उन्हें बिना सुनवाई या लिखित आदेश के गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में डाल दिया गया.

याचिकाकर्ताओं ने साफ किया है कि वे चुनाव रोकना नहीं चाहते, बल्कि सिर्फ कानून का सही पालन चाहते हैं. दोनों याचिकाओं में हटाए गए वोटरों को वापस जोड़ने, महाराष्ट्र में SIR पर रोक लगाने और मामले की जांच के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है. दोनों याचिकाओं पर अगले हफ्ते तत्काल सुनवाई की उम्मीद है.

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