भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मुंबई और उपनगरीय इलाकों में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से लाखों नाम कटने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. बताया जा रहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ड्राफ्ट रोल में करीब 35 लाख वोटरों के नाम हटने की कगार पर पहुंच गए हैं.
100% घरों पर नहीं गए बीएलओ
चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुंबादेवी के कांग्रेस विधायक अमीन पटेल कहा कि एसआईआर का अनिवार्य नियम था कि बीएलओ मतदाता के घर तीन बार जाएगा. अगर तीसरी बार भी व्यक्ति नहीं मिलता, तब पंचनामा करके नाम डिलीट किया जाना था. उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और सबूतों के साथ आरोप लगाया कि बीएलओ लोगों के घरों तक गए ही नहीं. जो लोग खुद बीएलओ तक पहुंचे, उनके फॉर्म कहीं बैठकर ले लिए गए. बाकी जिन घरों तक कर्मचारी नहीं पहुंचे, उन्हें सीधे 'एब्सेंट' दिखाकर नाम काट दिए गए, जो कानून के पूरी तरह खिलाफ है.
फॉर्म-6 हाथ में लेकर भटक रहे नागरिक
उन्होंने फॉर्म नंबर 6 की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर नए फॉर्म जमा करने के लिए भी बीएलओ केंद्रों पर मौजूद नहीं हैं. ड्यूटी पर लगाए गए स्कूल शिक्षकों को लेकर एक महीने से कोई स्पष्ट सर्कुलर नहीं आया है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाना है या एसआईआर का काम करना है. वार्ड के कर्मचारी अपने वार्डों में व्यस्त हैं और आम जनता फॉर्म हाथ में लेकर एक जगह से दूसरी जगह भटक रही है. लोगों को पता ही नहीं चल रहा कि फॉर्म किसे सौंपा जाए.
मुंबादेवी में 94 हजार नाम कटे
उन्होंने ये भी कहा कि भारी कागजी दस्तावेजों के साथ मोर्चा संभालते हुए कहा कि बीएलओ अनिवार्य नियम के अनुसार हर घर नहीं पहुंचे. इसके चलते केवल उनके ही इलाके में 94,000 नाम काट दिए गए, जबकि इनमें से कम से कम 50 प्रतिशत लोगों ने पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान किया था.
अमीन पटेल ने बताया कि मतदाताओं की मदद के लिए उन्होंने अपने कार्यालय में 15 लोगों की टीम लगाई है. साथ ही नोटिस, विसंगतियों और सुनवाई की तारीखों की जानकारी देने के लिए एक सॉफ्टवेयर और वेबसाइट भी शुरू की है.
वहीं, इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस.चोकलिंगम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह नागरिकों को बुलाने या घर जाने के बजाय वॉट्सऐप और ई-मेल पर ही डॉक्यूमेंट्स स्वीकार कर उनका सत्यापन करें. मंगलवार को सभी 288 ईआरओ और 7000 से अधिक एईआरओ के साथ ऑनलाइन बैठक में यह निर्देश दिए गए. राज्य भर में ड्राफ्ट रोल से कुल दो करोड़ नाम बाहर किए गए थे, जिनमें 1.5 करोड़ 'अनुपस्थित' या 'शिफ्टेड' कैटेगरी में थे. बीते एक माह में राज्य से केवल 3.9 लाख लोगों ने ही सूची में दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया.
बीएलओ की कड़ी मेहनत
उन्होंने ये भी दावा किया कि सरकारी कर्मचारी होने की वजह से बीएलओ कैमरे पर बोलने से हिचक रहे हैं, लेकिन बूथों पर बैठे राजनीतिक दलों के बीएलए उनकी मेहनत की सराहना कर रहे हैं.
बीएलए इखलाक अहमद खान और शेख शाहिदा ने बीएलओ के संघर्षों को रेखांकित किया. शाहिदा ने बताया कि अप्रैल से ये प्रक्रिया चल रही है और वो बीएलओ की पूरी मदद कर रहे हैं. इलाके में मुंबई का सबसे बड़ा क्लस्टर पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिससे लोग अस्थायी स्थानों पर रह रहे हैं. लोग पुणे से आकर भी दस्तावेज जमा कर रहे हैं ताकि हर योग्य मतदाता का नाम जुड़ सके.
मुस्तफा शेख