'यूपी चुनाव पर ध्यान दें, महाराष्ट्र की सियासत पर नहीं...', मराठी विवाद पर अखिलेश को मंत्री का जवाब

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिसमें यूपी के विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे देश की एकता प्रभावित होती है. इस पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनायक ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें इस मुद्दे पर राजनीति करके यूपी में चुनावी एजेंडा नहीं बनाना चाहिए.

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प्रताप बाबूराव सरनायक ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया. (Photo- X/PTI) प्रताप बाबूराव सरनायक ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया. (Photo- X/PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:09 PM IST

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस विवाद में अब यूपी में विपक्षी नेता अखिलेश यादव भी कूद गए हैं. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. उनके इस बयान पर महाराष्ट्र सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप बाबूराव सरनायक ने पलटवार किया है.

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और उत्थान होना चाहिए लेकिन किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. इससे देश की भाषिक-भाविक एकता में दूरी और दुराव पैदा होता है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई मेंबीजेपी के उत्तर भारतीय नेता हैं या भ्रष्टाचार में लीन होकर ठंडे पड़े हैं. क्या इस तरह की भाषा-ज्ञान की शर्त रखकर किसी को पूरे देश में व्यवसाय करने की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है?

'बीजेपी का सारा जोर गरीबों...'

अखिलेश ने कहा, 'अगर ऐसा ही है तो फिर जो विदेशी कंपनियां मुंबई में काम कर रही हैं, उन पर भी ये शर्त लागू हो लेकिन होगी नहीं. क्योंकि धन लोलुप बीजेपी धनवानों के आगे कालीन की तरह बिछने को तैयार रहती है, बीजेपी का सारा जोर गरीबों, शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों पर ही चलता है.'

सपा प्रमुख ने आगे कहा, 'एक तो बीजेपी सरकार नौकरी-रोजगार नहीं दे रही है, दूसरी तरफ जो अपनी रोज़ी-रोटी अपनी मेहनत से कमा रहे हैं, उन पर भी वार-प्रहार कर रही है. कहीं इसके पीछे भी कमीशनखोरी का खेल तो नहीं? हो सकता है बीजेपी को कमीशन का लालच देकर गाड़ियों की बड़ी कंपनियां आम जनता की सवारी आटो -रिक्शा ही बंद करवाना चाहती हों, जिससे लोग बड़ी कंपनियों की महंगी गाड़ियों से चलने के लिए मजबूर हो जाएं.'

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अखिलेश ने ये भी कहा कि अगर किसी राज्य में काम करने के लिए, स्थानीय भाषा के ज्ञान की यही अनिवार्य शर्त बाकी राज्यों ने लगा दी तो? हर व्यक्ति पढ़ा-लिखा नहीं होता है और न ही हर व्यक्ति की भाषिक क्षमताएं एकदम से किसी भाषा को सीखने योग्य होती हैं. अगर ऑटो-रिक्शावाले मानसिक दबाव में ऑटो चलाएंगे तो ये ड्राइवर के साथ-साथ सवारी-गाड़ी सबके लिए घातक साबित हो सकता है.

'महाराष्ट्र की सियासत पर नहीं, यूपी चुनावों पर ध्यान दें'

अखिलेश यादव के इस बयान पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप बाबूराव सरनायक ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की सियासत पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों पर ध्यान देना चाहिए. महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है. पिछले कई सालों से नॉर्थ इंडियन लोगों को नौकरी के मौके नहीं मिले, जिसकी वजह से महाराष्ट्र पिछले 40-50 सालों से नॉर्थ इंडियन लोगों को रोजी-रोटी दे रहा है.'

उन्होंने आगे कहा, 'महायुति सरकार एक ऐसी सरकार है जो नौकरी देती है, छीनती नहीं है. आप उत्तर प्रदेश के पूर्व CM हैं, आपके पिता भी उत्तर प्रदेश के CM थे. आप अपने समय में नौकरी नहीं दे पाए, इसलिए ये लोग महाराष्ट्र आए और हमने उन्हें अपना लिया. हमने उन्हें अपने भाइयों की तरह सपोर्ट किया. इसे UP में पॉलिटिक्स करके चुनावी एजेंडा न बनाएं.' 

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मंत्री ने दावा किया कि राज्य में 180 जगहों पर, हमने 1600-1800 टीचर (मराठी सिखाने के लिए) रखे हैं. हम बस इतना कह रहे हैं कि पैसेंजर्स से मराठी में बातचीत करें, मराठी प्राइड बनाए रखें. आपको 1 महीने का समय दिया जाएगा और उसके बाद 3 महीने का समय दिया जाएगा. अगर आप फिर भी मराठी नहीं सीख पाए, तो आपका बैज कैंसिल. क्योंकि ये महाराष्ट्र है. राज्य रोजी-रोटी देना जानता है, लेकिन महाराष्ट्र के गर्व और संस्कृति का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है.

यह भी पढ़ें: मुंबई में मराठी को लेकर ऑटो चालकों का चक्का जाम, ड्राइवर से मारपीट

फडणवीस बोले- भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होगा

दूसरी तरफ मराठी विवाद को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'हम अपने हिंदी बोलने वाले भाइयों को मराठी भाषा का एक्सपर्ट बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भाषा की काम की जानकारी होनी चाहिए. उन्हें भाषा सिखाने की कोशिश की जा रही है. भाषा सीखने की डेडलाइन अब तक तीन बार बढ़ाई जा चुकी है. हमारी महायुति सरकार भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होने देगी.'

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