महाराष्ट्र के बीड जिले में दिन पर दिन पानी का संकट गहराता जा रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर पारंपरिक रूप से पशुपालन करने वाले चरवाहों पर पड़ रहा है. चरागाह और खेत सूख जाने के कारण मवेशियों के लिए चारे और पीने के पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है. ऐसी स्थिति को देखते हुए स्थानीय चरवाहों ने प्रशासन से तत्काल चारा छावनियां शुरू करने और टैंकरों के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की.
बीड जिले के कई हिस्सों में कम बारिश होने और भीषण गर्मी बढ़ने के कारण हरा और सूखा चारा मिलना बेहद मुश्किल हो गया है. भेड़-बकरियों के खाने का प्रबंध करने के लिए चरवाहों को दूर-दूर भटकना पड़ रहा है.
पानी की कमी बढ़ने से पशुधन के साथ-साथ चरवाहों के परिवारों के लिए भी पीने के पानी का बहुत संकट हो गया है. चारे के अभाव और बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने के कारण भेड़ों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है. वहीं, कुछ इलाकों में पशुओं के बीमार होने की भी खबरे हैं. इसके चलते चरवाहा समुदाय बहुत गहरे आर्थिक संकट में पड़ गई है.
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एक सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत हजारे ने भी इस मुद्दे पर बात की. उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सबके लिए होती है. उन्होंने सरकार से इस तरफ ध्यान देने की अपील की है. उनका कहना है कि भेड़, बकरियों के लिए खाने के लिए घास तक नहीं है, इसलिए सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि भेड़-बकरियों को चारे और पानी की किल्लत हो रही है. उन्होंने पशुपालन मंत्री पंकडा मुंडे से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और इस समस्या को दूर करना चाहिए.
रोहिदास हातागले