महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर, यानी नॉन-डेयरी पनीर, के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया है. इस कदम के साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ऐसा फैसला लेने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है.
सरकार ने साफ किया है कि नियम तोड़ने वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी. अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
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30 जुलाई को खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, परिवहन, थोक और खुदरा बिक्री, साथ ही बिक्री के लिए पेश करने पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी. यानी अब इस तरह के पनीर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर प्रतिबंध लागू होगा.
एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचने पर होगी कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि प्रशासन, यानी एफडीए, ने भी इस मामले में अपना रुख साफ किया है. विभाग के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचता है, तो इसे उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा. साथ ही, इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि माना जाएगा. ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई थी
यह मुद्दा नया नहीं है. पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा में भी इसे उठाया गया था. उस दौरान विधायकों ने एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. अब सरकार ने उस दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए राज्यभर में इस पर रोक लगा दी है.
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार ने साफ संदेश दिया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, एफडीए की सख्त चेतावनी और जेल से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान, इस फैसले को राज्य की बड़ी कार्रवाई बनाता है.
दीपेश त्रिपाठी