महाराष्ट्र में महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने वाली 'लाडकी बहिन योजना' अब सियासी विवाद में घिर गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले महिलाओं को योजना का फायदा दिया और सत्ता में आने के बाद बड़ी संख्या में उनके नाम हटा दिए.
वडेट्टीवार ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि योजना के लाभार्थियों की संख्या 2.48 करोड़ से घटकर करीब 1.65 करोड़ रह गई है. यानी करीब 92.10 लाख नाम कम हुए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम आखिर क्यों हटाए गए.
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना के 68 लाख खाते बंद, e-KYC नहीं कराने पर कार्रवाई
कांग्रेस नेता ने कहा कि एक व्हिसलब्लोअर कार्यकर्ता ने भी इस मामले को सामने उठाया है. उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर कुछ लोग योजना के लिए पात्र नहीं थे, तो उनकी पहचान कैसे हुई और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.
ई-केवाईसी पूरी नहीं होने से हटाए गए नाम!
वडेट्टीवार के मुताबिक, करीब 62 लाख लाभार्थियों के नाम ई-केवाईसी पूरी नहीं होने की वजह से हटाए गए. करीब 16 लाख महिलाएं आय की शर्त पूरी नहीं करती थीं. 4.42 लाख नाम ऐसे थे, जहां ई-केवाईसी में सरकारी कर्मचारी होने की जानकारी सामने आई. करीब 2.5 लाख मामलों में एक ही परिवार की दो से ज्यादा महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा था.
इसके अलावा करीब 1.8 लाख महिलाएं 65 साल से ज्यादा उम्र की पाई गईं. करीब 1.7 लाख नाम जिला स्तर पर पात्रता पूरी नहीं करने के कारण हटाए गए. वहीं करीब 8 हजार लाभार्थियों के सरकारी कर्मचारी होने की जानकारी सामने आई.
चुनावी मौसम में सरकार ने बनाई थी योजना
कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने सरकार से सवाल किया कि अगर अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला था, तो उनसे पैसा वापस क्यों नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.
यह भी पढ़ें: मोबाइल नेटवर्क के चलते क्यों परेशान 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' की लाभार्थी? देखें
‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ अगस्त 2024 में शुरू की गई थी. इसे विधानसभा चुनाव से पहले महायुति सरकार की बड़ी योजना माना गया था. इसके तहत 21 से 65 साल की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं.
हालांकि, सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि लाभार्थियों की संख्या कम होने की बड़ी वजह ई-केवाईसी पूरी नहीं होना और आय से जुड़े नियम हैं. ऐसे में अब कांग्रेस के आरोपों के बाद इस योजना को लेकर सियासी घमासान और बढ़ गया है.
aajtak.in