सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ड्राइवर के परिवार को राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने तीन गुना बढ़ाया मुआवजा

झारखंड हाईकोर्ट से सड़क हादसे में जान गंवाने वाले भारी वाहन चालक के परिवार को 12 साल बाद इंसाफ मिला है. अदालत ने मृतक के परिजन को दिए जाने वाले मुआवजे को 5,76,000 रुपये से बढ़ाकर 18,30,000 रुपये कर दिया है. कोर्ट ने बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत साधारण ब्याज भी देने का आदेश दिया है, जो मुआवजे से लगभग 3.18 गुना ज्यादा है.

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झारखंड हाईकोर्ट ने मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत की रकम भी जोड़ी. (Photo- ITGD) झारखंड हाईकोर्ट ने मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत की रकम भी जोड़ी. (Photo- ITGD)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:49 PM IST

झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक भारी वाहन चालक के परिवार को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के दिए गए 5,76,000 रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 18,30,000 रुपये कर दिया है. 

साल 2014 में दाखिल की गई एक अपील (M.A. No. 21 of 2014) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक ने 28 अगस्त 2026 को ये फैसला सुनाया है.

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हाईकोर्ट ने मुआवजे की रकम के साथ 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया है. ये ब्याज असल मुआवजे से लगभग 3.18 गुना ज्यादा है.

झारखंड हाईकोर्ट ने भारी वाहन चालकों के काम के बारे में कहा कि भारी वाहन चलाना एक कुशल कार्य है. किसी भी भारी वाहन के ड्राइवर को सेमी-स्किल्ड मजदूर नहीं माना जा सकता.

मासिक आय 4,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह

बता दें कि साल 2012 में पाकुड़ के MACT ने मृतक चालक जहांगीर खान की मासिक आय 4,500 रुपये तय की थी. हाईकोर्ट ने इस आय पर विचार करते हुए इसे 10,000 रुपये प्रति माह माना. अदालत ने इसमें 40 प्रतिशत 'फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स' जोड़ते हुए मुआवजा की रकम 18,30,000 रुपये तय की.

अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि वो पूरी बढ़ी हुई राशि 6 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में जमा करे. ब्याज 7 जनवरी 2012 (दावा याचिका की तारीख) से भुगतान तक देना होगा. हालांकि अपील दाखिल करने में हुए 388 दिनों के विलंब की अवधि के ब्याज से बीमा कंपनी को छूट दी गई है.

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मुख्य न्यायाधीश ने की एमिकस क्यूरी की तारीफ

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक ने कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी एडवोकेट अनिकेत कुमार ओझा की तारीफ की. अदालत ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि अनिकेत ओझा ने अपीलकर्ताओं का पक्ष बहुत अच्छे से पेश किया. न्यायालय ने 'झालसा' को निर्देश दिया कि वो पैनल एडवोकेट के तय नियमों के मुताबिक ओझा को उनकी फीस का भुगतान करें.

यह भी पढ़ें: हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आचार संहिता उल्लंघन मामले की कार्यवाही रद्द

पीड़ित परिवार के खाते में सीधे जाएंगे पैसे

शोषण से बचाने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी, झालसा और साहिबगंज DLSA को निर्देश दिया है कि वो दावेदार परिवार से खुद संपर्क करके मदद करें, ताकि पूरी रकम सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो सके.

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