J-K: राहुल भट्ट की हत्या पर कश्मीरी पंडितों का फूटा गुस्सा, सरकार से सुरक्षा पर किया सवाल, हाईवे किया जाम

कश्मीर के बडगाम में कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या के बाद से माहौल तनावपूर्ण बन गया है. कश्मीरी पंडित सड़क पर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं, सुरक्षा की गारंटी मांग रहे हैं और पीएम मोदी- गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.

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कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश (फोटो- नीरज कुमार) कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश (फोटो- नीरज कुमार)

सुनील जी भट्ट

  • जम्मू,
  • 12 मई 2022,
  • अपडेटेड 11:43 PM IST

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में एक तहसील दफ्तर में अंदर घुसकर आतंकियों ने राजस्व अधिकारी राहुल भट्ट की हत्या कर दी. उन्हें गोली मारी गई. अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली. 

अब क्योंकि राहुल भट्ट एक कश्मीरी पंडित थे, लिहाजा इलाके में आक्रोशित लोगों ने श्रीनगर हाइवे जाम कर दिया. जो वीडियो सामने आया है उसमें क्या महिला, क्या पुरुष सभी सड़क पर बैठ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. न्याय की मांग की जा रही है, कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा की गारंटी मांगी जा रही है. मौके पर पुलिस भी दिखी लेकिन आक्रोशित लोगों ने सड़क नहीं छोड़ी. सभी को इस बात का गुस्सा है कि घाटी में लगातार कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया जा रहा है. उनकी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे.

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने भी इस घटना पर नाराजगी जाहिर की. फारूक अब्दुल्ला ने आजतक से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि मैं एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बारे में सुनकर बहुत दुखी हूं. यह वारदात दूसरे लोगों में भी डर पैदा करेगी. सरकार विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह विफल रही है. पूर्व मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ती जा रही है और सरकार कश्मीर की नकली गुलाबी तस्वीर पेश करने में लगी है. कश्मीर में हालात ठीक नहीं हैं. 

अब इतना गुस्सा इसलिए देखने को मिल रहा है क्योंकि राहुल भट्ट की हत्या के बाद से उसका परिवार पूरी तरह अकेला रह गया है. बडगाम में राहुल अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था. वो 2010 से घाटी में राजस्व विभाग के साथ जुड़ा हुआ था. उसे प्रधानमंत्री स्पेशल एम्प्लॉयमेंट पैकेज के तहत नौकरी मिली थी.

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यहां ये जानना जरूरी हो जाता है कि राहुल का परिवार भी 1990 के दशक में घाटी छोड़ चला गया था. जब कश्मीरी पंडितों के खिलाफ बड़े स्तर पर हिंसा हुई थी, तब उसका परिवार भी अपना आशियाना छोड़ घाटी से जाने को मजबूर हुआ था. जब आजतक ने राहुल के पिता से इस बारे में बात की, वे भावुक हो गए. उन्हें इस बात की नाराजगी है कि उन्होंने अपने बेटे को वापस घाटी भेजा.

इसी वजह से राहुल की हत्या ने जमीन पर स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है. अभी तक शांत बैठे कश्मीरी पंडित अब विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कश्मीरी पंडितों को एक मैसेज भेजा जा रहा है. सभी से कल शुक्रवार को राज्यपाल के घर के बाहर एकजुट होने की अपील की गई है. कहा गया है कि सुबह 10 बजे सभी एक साथ आएं और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करे.

अब बताया गया है कि कश्मीर पंडित सरकार ने कश्मीर में अपने लिए सुरक्षा चाहते हैं. इस सुरक्षा में वे अपनी रक्षा के लिए बंदूक भी चाहते हैं. अगर ये संभव ना हो पाए, तो ये कश्मीरी पंडित वापस जम्मू जाना चाहते हैं. वे खुद को घाटी में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. इसके लिए वे वर्तमान सरकार को भी जिम्मेदार मान रहे हैं. उनका कहना है कि बीजेपी कश्मीरी पंडितों को किए वादों को पूरा नहीं कर पाई है. सड़क पर जो प्रदर्शन भी हुए, उनमें पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी होती दिखी.

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वैसे कश्मीरी पंडित जरूर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं, लेकिन सरकार को लगता है कि पिछले कुछ सालों में घाटी के हालात में काफी सुधार हुआ है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद तो आतंकी घटनाओं में काफी कमी आ गई है. सक्रिय आतंकियों की संख्या भी महज 150 रह गई है. लेकिन सीआरपीएफ के मुताबिक इस ट्रेंड में चिंता का विषय ये है कि 60 फीसदी से ज्यादा कश्मीरी मूल के आतंकी हैं, यानी की वो स्थानीय हैं. वहीं 85 विदेशी मूल के आतंकी बताए जा रहे हैं.

 

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