हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचकर आप भारत-पाकिस्तान के बीच हुई 1965 की जंग की कहानी जान सकते हैं. यहां एक पाकिस्तानी पैटन टैंक रखा है. इसकी तोप नीचे की तरफ झुकी हुई है. इसके पास ही भारतीय सेना का विजयंत टैंक भी है, जिसकी तोप ऊपर की ओर उठी हुई दिखाई देती है.
पहली नजर में ये दोनों टैंक आपको पुराने हथियार लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे जंग से जुड़ी एक कहानी है. स्टेट वॉर मेमोरियल धर्मशाला में रखे इन टैंकों को देखने आने वाले लोग इनके बारे में जानने में दिलचस्पी लेते हैं. यहां रखे पाकिस्तानी पैटन टैंक का संबंध 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग से है.
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धर्मशाला के स्टेट वॉर मेमोरियल में रखा पैटन टैंक 1965 की जंग की याद दिलाता है. स्टेट वॉर मेमोरियल के चेयरमैन रिटायर्ड कर्नल केकेएस डढवाल के मुताबिक, यह टैंक चविंडा की लड़ाई के दौरान इस्तेमाल किया गया था. उस समय भारतीय सेना की फर्स्ट आर्मर्ड डिवीजन का मुकाबला पाकिस्तान की सिक्स्थ आर्मर्ड डिवीजन से हुआ था. इस लड़ाई में कई पाकिस्तानी टैंक भारतीय सेना के कब्जे में आए थे. इनमें से एक पैटन टैंक को बाद में धर्मशाला के युद्ध स्मारक में रखा गया.
कर्नल डढवाल के मुताबिक, राज्य सरकार के अनुरोध पर भारतीय सेना ने इस टैंक को यहां स्थापित किया था. अब यहां आने वाले लोग इसे करीब से देख सकते हैं और 1965 की जंग के बारे में जान सकते हैं.
तोप नीचे और ऊपर होने का क्या मतलब है?
इस युद्ध स्मारक में एक बात लोगों का ध्यान खींचती है. पाकिस्तानी पैटन टैंक की तोप नीचे की ओर झुकी हुई है, जबकि भारतीय विजयंत टैंक की तोप ऊपर की ओर उठी हुई है. कर्नल केकेएस डढवाल इसे हार और जीत से जोड़कर देखते हैं. उनके मुताबिक, पैटन टैंक की नीचे झुकी तोप पाकिस्तान की हार का प्रतीक है, जबकि विजयंत टैंक की ऊपर उठी तोप जीत का संदेश देती है. यानी यहां टैंकों की बनावट और उन्हें किस तरह रखा गया है, उसके जरिए भी लोगों को जंग से जुड़ी कहानी समझाने की कोशिश की गई है.
कर्नल डढवाल बताते हैं कि 1965 के दौर में पैटन टैंक को दुनिया के सबसे आधुनिक टैंकों में गिना जाता था. उस समय पाकिस्तान की सेना के पास ऐसे टैंक थे, जबकि भारतीय सेना के पास तुलनात्मक रूप से पुराने टैंक भी थे. इसके बावजूद भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना का मुकाबला किया. इसी वजह से धर्मशाला में रखा यह टैंक भारतीय सेना की बहादुरी और उस दौर की लड़ाई की याद दिलाता है.
पैटन टैंक में चार लोगों की टीम काम करती थी. इसमें कमांडर, गनर, लोडर और रेडियो ऑपरेटर शामिल होते थे. हर व्यक्ति की अलग जिम्मेदारी होती थी और सभी को मिलकर टैंक चलाना पड़ता था.
धर्मशाला आने वाले पर्यटक भी जान रहे हैं जंग की कहानी
स्टेट वॉर मेमोरियल में रखे टैंक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. लोग यहां आकर टैंकों को देखते हैं और उनके बारे में जानकारी लेते हैं. पैटन टैंक के साथ यहां विजयंत टैंक भी रखा है. दोनों टैंकों को एक साथ देखने पर भारतीय सेना के इतिहास और पुराने दौर में इस्तेमाल होने वाले हथियारों के बारे में जानने का मौका मिलता है. धर्मशाला का यह युद्ध स्मारक उन सैनिकों की याद भी दिलाता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी. यहां रखा पाकिस्तानी पैटन टैंक उसी इतिहास से जुड़ा है, जो आज भी 1965 की जंग की कहानी लोगों तक पहुंचा रहा है.
पूजा शर्मा