दिवाली-छठ पर गांव जाना बना मुसीबत! जनरल कोच में 120 की जगह 600 यात्री, स्टेशन पर प्रवासियों का छलका दर्द

दिवाली और छठ पर घर जाने के लिए सूरत के उधना स्टेशन पर हजारों प्रवासी यात्री परेशान हैं. कोई 8 घंटे से लाइन में खड़ा है तो कोई ट्रेन में जगह पाने के लिए धक्के खा रहा है. यात्रियों का आरोप है कि 120 की क्षमता वाले जनरल कोच में 500 से 600 लोग भरे जा रहे हैं. रेलवे ने 10 ट्रेनों के संचालन और व्यवस्थाओं का दावा किया है.

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120 की क्षमता वाले कोच में 600 यात्री!(Photo: Sanjay Singh Rathore/ITG) 120 की क्षमता वाले कोच में 600 यात्री!(Photo: Sanjay Singh Rathore/ITG)

संजय सिंह राठौर

  • सूरत,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

दिवाली और छठ पूजा पर परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले प्रवासी मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है. गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों यात्रियों की भीड़ उमड़ रही है. हालात ऐसे हैं कि टिकट और ट्रेन में जगह पाने के लिए लोगों को 6 से 8 घंटे तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है. इसके बावजूद कन्फर्म सीट मिलने की कोई गारंटी नहीं है.

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स्टेशन पर भीड़ का आलम यह है कि ट्रेन पहुंचते ही उसमें चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है. कई लोग चढ़ने की कोशिश में गिर भी रहे हैं. सबसे खराब स्थिति जनरल कोचों की है. यात्रियों का आरोप है कि जिस डिब्बे में करीब 120 लोगों के बैठने की क्षमता होती है, उसमें 500 से 600 लोगों को भर दिया जा रहा है. ऐसे में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती और लोगों को खड़े होकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है.

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यात्रियों का कहना है कि हर साल दिवाली और छठ के दौरान सूरत से यूपी-बिहार जाने वालों की संख्या बढ़ जाती है. इसके बावजूद रेलवे की व्यवस्थाएं यात्रियों की भीड़ के हिसाब से पर्याप्त नहीं होतीं. परिवार के साथ त्योहार मनाने की उम्मीद लेकर निकले लोग घंटों स्टेशन पर इंतजार कर रहे हैं. उन्हें यह भी पता नहीं है कि वे समय पर अपने गांव पहुंच पाएंगे या नहीं.

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6-8 घंटे लाइन में इंतजार, यात्रियों ने सुनाई अपनी परेशानी

उत्तर प्रदेश के बनारस जाने वाले यात्री सचिन राजभर ने बताया कि वह पिछले दिन शाम करीब 6 से 7 बजे ही स्टेशन पहुंच गए थे. इसके बाद से लगातार लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब तक उन्हें टिकट नहीं मिल पाया है. घर जाने के लिए कोई उचित व्यवस्था भी नहीं हुई है. सचिन का कहना है कि इतनी दूर मेहनत-मजदूरी करने आते हैं, लेकिन त्योहार पर परिवार के पास नहीं पहुंच पाए तो यहां काम करने का क्या फायदा.

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेन में यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह भरा जा रहा है. बिना उचित व्यवस्था के लोगों को डिब्बों में चढ़ाया जा रहा है. इस दौरान कई यात्री गिर भी गए. सचिन के मुताबिक, कुछ लोग गिरने के बाद वापस आकर कतार में लग गए, लेकिन उन्हें अब तक बनारस जाने के लिए जगह नहीं मिल पाई है. उन्हें चिंता है कि दिवाली पर परिवार के साथ घर पहुंच भी पाएंगे या नहीं.

एक अन्य यात्री सत्यम तिवारी ने बताया कि वह दोपहर करीब ढाई से तीन बजे से स्टेशन पर खड़े हैं. जिस ट्रेन से उन्हें जाना था, वह निकल चुकी है और अब अगली गाड़ी का इंतजार करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद छठ पूजा भी है और हजारों लोग अपने घर जाने के लिए परेशान हैं. स्टेशन पर यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नजर नहीं आ रही हैं.

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पानी और बैठने की सुविधा पर भी उठाए सवाल

सत्यम तिवारी के मुताबिक, स्टेशन पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है. उन्होंने रेलवे प्रशासन से सवाल किया कि जब हजारों यात्री परेशान हैं तो उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए क्या किया जा रहा है. उन्हें बनारस जाना है, लेकिन अगली ट्रेन में जगह मिलेगी या नहीं, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

दानापुर जाने वाले यात्री धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि वह सुबह करीब 3 बजे से कतार में खड़े हैं. दानापुर जाने वाली ट्रेन निकल चुकी है और अब उन्हें भागलपुर जाने वाली अगली ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है. हालांकि, उसमें जगह मिलेगी या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं है.

धर्मेंद्र ने कहा कि लगातार कई घंटों तक खड़े रहने से उनके पैरों में दर्द होने लगा है. स्टेशन पर यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं हैं. उन्होंने बताया कि अगले दिन दिवाली है और उन्हें चिंता सता रही है कि वह समय पर घर पहुंचकर परिवार के साथ त्योहार मना भी पाएंगे या नहीं.

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रेलवे का दावा- यूपी-बिहार के लिए चल रहीं 10 ट्रेनें

दूसरी ओर, पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अनुभव सक्सेना ने बताया कि यात्रियों की सुविधा रेलवे की प्राथमिकता है. दिवाली और छठ के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए नियमित ट्रेनों के अलावा विशेष गाड़ियों का संचालन भी किया जा रहा है. उनके मुताबिक, शनिवार को उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए कुल 10 ट्रेनें निर्धारित हैं.

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इनमें से 6 ट्रेनें रवाना हो चुकी हैं, जबकि 4 का संचालन होना बाकी है. इन 10 गाड़ियों में 3 नियमित और 7 विशेष ट्रेनें शामिल हैं. इनमें से दो ट्रेनें जयनगर के लिए भी निर्धारित हैं. रेलवे अधिकारी ने दावा किया कि अब तक 15 हजार से अधिक यात्री रवाना हो चुके हैं. यात्रियों की संख्या बढ़ने पर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा.

अनुभव सक्सेना ने बताया कि स्टेशन पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान तैनात हैं. वे यात्रियों को कतारबद्ध तरीके से ट्रेन के डिब्बों तक पहुंचा रहे हैं. इसके अलावा कमर्शियल स्टाफ और टिकट काउंटर भी सक्रिय हैं. ग्राहक सुविधा केंद्र पर विशेष टिकट काउंटर, पीने के पानी और बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की गई है. रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं.

रेलवे के इंतजामों पर यात्रियों के सवाल, सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

हालांकि, रेलवे प्रशासन अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने और सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, लेकिन स्टेशन पर यात्रियों की परेशानी इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है. हर साल दिवाली और छठ के दौरान सूरत से उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले प्रवासियों की भारी भीड़ जुटती है. ऐसे में सवाल उठता है कि रेलवे पहले से पर्याप्त ट्रेनों, अतिरिक्त कोचों और सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं करता.

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यात्रियों ने जनरल कोचों में क्षमता से कई गुना अधिक लोगों के सवार होने पर भी सवाल उठाए हैं. एक तरफ सड़क पर बाइक पर तीन सवारी बैठने पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करती है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेनों के जनरल डिब्बों में 120 की क्षमता के मुकाबले 500 से 600 यात्रियों के सवार होने के आरोप हैं. ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन करता है या नहीं. फिलहाल उधना स्टेशन पर मौजूद हजारों प्रवासियों की एक ही कोशिश है कि किसी तरह ट्रेन में जगह मिल जाए और वे दिवाली तथा छठ का त्योहार अपने परिवार के साथ गांव में मना सकें.

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