जंगल में शेरनी शिकार करती है. उसकी एक दहाड़ से पूरा जंगल अलर्ट हो जाता है. लेकिन कभी-कभी जंगल की सबसे ताकतवर शिकारी भी ऐसी मुसीबत में फंस जाती है, जहां उसे इंसानों की मदद का इंतजार करना पड़ता है. गुजरात के जूनागढ़ से आई यह कहानी ऐसी ही है.
एक खेत... उसके बीच बना गहरा कुआं... और उसमें गिरी करीब एक से दो साल की एक शेरनी. बाहर निकलने की हर कोशिश बेकार हो रही थी. ऊपर आसमान दिखाई दे रहा था, लेकिन निकलने का कोई रास्ता नहीं था. यह घटना जूनागढ़ जिले के मालिया हाटीना क्षेत्र के कुकसवाड़ा गांव की है. गांव वालों ने जब कुएं के अंदर शेरनी को देखा तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. कुछ ही देर में इसकी सूचना वन विभाग तक पहुंच गई.
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. लेकिन चुनौती आसान नहीं थी. एक तरफ गहरा कुआं था, दूसरी तरफ डरी और घबराई हुई शेरनी. अगर वह घबरा जाती, तो खुद को और ज्यादा चोट पहुंचा सकती थी. वहीं जल्दबाजी में किया गया कोई भी कदम रेस्क्यू टीम के लिए भी जोखिम भरा हो सकता था.
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इसलिए वन विभाग ने पूरे ऑपरेशन को बेहद सावधानी से अंजाम दिया. टीम ने पहले हालात को समझा. फिर सुरक्षित तरीके से शेरनी तक पहुंचने की तैयारी शुरू हुई. काफी मशक्कत के बाद आखिरकार शेरनी को बिना किसी नुकसान के कुएं से निकाल लिया गया.
वन विभाग शेरनी को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा. उसे सिमर रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका हेल्थ चेकअप किया. कुएं में गिरने से कहीं अंदरूनी चोट तो नहीं लगी? कहीं हड्डी में फ्रैक्चर तो नहीं? कहीं वह सदमे में तो नहीं? इन सभी पहलुओं की जांच की गई. कुछ समय तक निगरानी में रखने के बाद डॉक्टरों ने राहत की खबर दी कि शेरनी पूरी तरह स्वस्थ है.
जब यह तय हो गया कि अब शेरनी पूरी तरह फिट है, तब वन विभाग उसे वापस उसी जंगल में लेकर पहुंचा, जहां से उसका सफर अचानक कुएं तक पहुंच गया था. पिंजरे का दरवाजा खुला... कुछ पल के लिए शेरनी ने बाहर का माहौल देखा. फिर वह तेजी से जंगल की ओर दौड़ पड़ी. कुछ ही देर बाद वह अपने ग्रुप की तरफ बढ़ गई. मानो अपने परिवार से बिछड़ने के बाद फिर घर लौट आई हो.
पश्चिम गिर रेंज के डीसीएफ प्रशांत तोमर के मुताबिक, पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया में इस बात का खास ध्यान रखा गया कि शेरनी को कोई चोट न पहुंचे. हेल्थ चेकअप के बाद ही उसे जंगल में छोड़ा गया. वन विभाग के लिए यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि गिर के वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी जिम्मेदारी भी थी. गुजरात का गिर एशियाई शेरों का प्राकृतिक घर माना जाता है. यहां इंसानों और वन्यजीवों का सामना अक्सर हो जाता है.
भार्गवी जोशी