बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में कथित कुप्रबंधन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में बार काउंसिल यानी भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष को हटाने और उनके कार्यकाल की सीमा तय करने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है.
याचिका के मुताबिक, BCI के अध्यक्ष पद पर 10 साल से ज्यादा समय से बने हुए मनन कुमार मिश्रा को तत्काल पद से हटाने और उनके लगातार पद पर बने रहने को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई है. इसके साथ ही BCI अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कार्यकाल की सीमा तय करने और किसी भी व्यक्ति के इस पद पर चुनाव लड़ने की संख्या सीमित करने का अनुरोध किया गया है.
याचिका में 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' यानी दो कार्यकालों के बीच की अवधि में उसी पद पर फिर चुनाव लड़ने पर पाबंदी लागू करने की भी मांग की गई है. इससे राज्य बार काउंसिलों के चुनाव लंबित रहने के दौरान अनिश्चितकाल तक पद पर बने रहने पर रोक लगाई जा सकेगी.
इन मुद्दों को लेकर उठाया सवाल
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषित करने की मांग की गई है कि BCI अध्यक्ष का पद एक वैधानिक नियामक संस्था का प्रमुख होने के नाते राजनीतिक गतिविधियों से मुक्त, स्वतंत्र और तटस्थ होना चाहिए. ढांचागत सुधार और पारदर्शिता की गुहार लगाते हुए याचिका में BCI में कथित संस्थागत नियंत्रण के संकेंद्रण, शक्ति के दीर्घकालिक केंद्रीकरण, चुनाव संबंधी वैधानिक नियमों के उल्लंघन, मनमाने नियामक फैसलों और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं. समयबद्ध चुनाव के सिलसिले में राज्य बार काउंसिलों और BCI के लिए समयबद्ध तरीके से चुनाव संपन्न कराने के निर्देश देने की मांग की गई है.
जांच की भी मांग
पारदर्शी वित्तीय ऑडिट को लेकर याचिका में कहा गया है कि BCI के वैधानिक कोष, ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) से प्राप्त शुल्क और अन्य संस्थागत राजस्व का निष्पक्ष और पूर्ण ऑडिट कराया जाए. BCI और इससे जुड़े 1974 ट्रस्ट, B.C.I. ट्रस्ट PEARL-FIRST तथा IIULER (गोवा) के बीच वित्तीय संबंधों, ठेकों और लेन-देन की समयबद्ध और गहन जांच की भी मांग की गई है.
संजय शर्मा