ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शांति बनाए रखने के लिए पीस बॉन्ड भरने और उस पर दस्तखत करने से फिर इनकार कर दिया है. उन्होंने चौथी बार ऐसा किया है. इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने उन्हें 20 नवंबर 2026 को फिर पेश होने का निर्देश दिया है. नेहा बोरा और उनके संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना कोई अपराध नहीं है. उनका तर्क है कि पीस बॉन्ड के जरिए अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकार पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है.
दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद SEM कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उन सभी छह एफआईआर और जांच से जुड़े दस्तावेज नेहा बोरा को देने का आदेश दिया था, जिनके आधार पर पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका जताई थी. पुलिस ने ये सभी दस्तावेज नेहा बोरा को सौंप दिए हैं.
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इससे पहले 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस और समन को रद्द करने की नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने पुलिस की निवारक कार्रवाई को सही ठहराते हुए उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद मामला फिर से SEM कोर्ट में पहुंच गया.
CEC के खिलाफ प्रदर्शन से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला 16 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है. दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को अवैध बताते हुए नेहा बोरा के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की थी.
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इस धारा के तहत शांति भंग होने की आशंका के आधार पर निवारक कार्रवाई की जा सकती है. इसी प्रक्रिया के तहत नेहा बोरा से पीस बॉन्ड भरने को कहा गया है. हालांकि, नेहा बोरा और उनके संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए इस तरह का बॉन्ड भरने की बाध्यता उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करती है.
अब 20 नवंबर को SEM कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में यह देखना होगा कि नेहा बोरा के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के बाद अदालत आगे क्या कदम उठाती है.
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