केंद्र का बड़ा कदम, पिछले 5 साल में 6 परमाणु परियोजनाओं के लिए मंजूर किए 13,355 करोड़

केंद्र सरकार ने देश में छह निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 13,355 करोड़ रुपये की इक्विटी मंजूर की है, जो पूरी तरह से खर्च भी हो चुकी है. परियोजनाओं में देरी के कारणों में फुकुशिमा घटना के बाद सुरक्षा मानकों में बदलाव, कोविड-19 महामारी, उपकरण आपूर्ति में बाधाएं, रूस-यूक्रेन संघर्ष और कुशल मजदूरों की कमी शामिल हैं.

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केंद्र सरकार ने पिछले 5 साल में 6 परमाणु परियोजनाओं के मंजूर किए 13,355 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. (फाइल फोटो-ITG) केंद्र सरकार ने पिछले 5 साल में 6 परमाणु परियोजनाओं के मंजूर किए 13,355 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. (फाइल फोटो-ITG)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:33 PM IST

देश में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली प्रोडक्शन को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा वित्तीय कदम उठाया है. परमाणु ऊर्जा मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि पिछले पांच सालों के दौरान देश में निर्माणाधीन 6 परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सरकार ने 13,355 करोड़ रुपये की इक्विटी मंजूर की है. सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार की ओर से जारी किया गया यह पूरा फंड पूरी तरह से इस्तेमाल भी कर लिया गया है.

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इन वजहों से प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में हुई देरी

केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब दिया. इसमें उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें शुरू करने में पिछले कुछ समय से कई तरह की रुकावटें आई हैं, जिनकी वजह से देरी हुई है. इसमें मुख्य रूप से जापान की फुकुशिमा घटना के बाद सुरक्षा मानकों के तहत डिजाइन में किए गए बड़े बदलाव, जरूरी उपकरणों की आपूर्ति में देरी, कोविड-19 महामारी और उससे जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं.

 इसके अलावा रूस से सप्लाई में दिक्कतें, कोरोना के बाद ठेकेदारों के सामने आए पैसों की तंगी, कठिन मिट्टी की स्थिति, कुशल मजदूरों की कमी और रूस-यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संघर्षों का भी बुरा असर पड़ा है.

चुनौतियों से निपटने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदम

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इन तमाम मुश्किलों और देरी से निपटने के लिए सरकार और परमाणु ऊर्जा निगम द्वारा कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. एनपीसीआईएल और परमाणु ऊर्जा विभाग की ओर से समय-समय पर उच्च स्तर पर परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है. इनकी प्रोग्रेस पर भी लगातार नजर रखी जा रही है ताकि समय रहते समस्याओं की पहचान करके जरूरी बदलाव किए जा सकें.

 वेंडर्स के साथ लगातार बैठकें करके निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं और निगरानी के लिए एक बोर्ड सब-कमिटी भी बनाई गई है. भविष्य में उपकरणों की कमी से बचने के लिए फ्लीट मोड में बड़े पैमाने पर एक साथ ऑर्डर देने की रणनीति भी अपनाई गई है.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि इन सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं के क्रमिक रूप से शुरू होने पर देश की राष्ट्रीय ग्रिड में कुल 8,000 मेगावाट की क्षमता और जुड़ जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि फ्लीट मोड दृष्टिकोण और भारी मात्रा में एक साथ खरीदारी करने से भविष्य के रिएक्टर्स के लिए उपकरणों की आपूर्ति में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा.

यह भी पढ़ें: इस मुस्लिम देश में सीक्रेटली जमीन के अंदर दबा है परमाणु मटेरियल, अब हटाने की तैयारी

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता और देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है.

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