आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह 4 अगस्त मंगलवार को दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर की तरफ मार्च करेंगे.
केजरीवाल अपने साथ ऐसे 100 लोगों को लेकर जाएंगे जो लाठियों से नहीं डरते हैं. वह प्रधानमंत्री को 2 लाख से ज्यादा लोगों के साइन वाली पिटीशन सौंपेंगे, जो सरकार की E20 पेट्रोल पॉलिसी यानी पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने की नीति के खिलाफ है.
यह पूरा मामला ऐसे समय पर गरमाया है जब हाल ही में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में भारी बवाल हुआ था. 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की सख्ती के बाद गुस्सा और भड़क गया था, जिसके चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. विपक्ष अब उसी तर्ज पर E20 पेट्रोल के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है.
ट्रंप को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप
आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सरकार के सामने पेट्रोल और एथनॉल मिश्रण E20 को लेकर तीन बेहद अहम मांगें रखी हैं. केजरीवाल का कहना है कि ये मांगें उनकी निजी नहीं, बल्कि देश की आम जनता की तरफ से हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए सीधे तौर पर आम कस्टमर्स के हितों और जेब को ध्यान में रखकर आवाज उठाई है.
दरअसल, आज शनिवार को आम आदमी पार्टी की ओर से कॉस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक टाउनहाल रखा गया था. इस दौरान केजरीवाल ने सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने पीएम मोदी पर ट्रंप को फायदा पहुंचाने के लिए E20 को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 'मोदी जी ट्रंप को खुश करने के लिए हमारे देश पर जबरदस्ती एथनॉल थोप रहे हैं. अमेरिका एथनॉल का प्रोडक्शन करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है. पिछले साल भारत ने अमेरिका से 1 बिलियन लीटर एथनॉल इंपोर्ट किया था. इस साल E20 लागू होने के बाद, भारत पिछले साल की तुलना में अमेरिका से 5 गुना अधिक एथनॉल इंपोर्ट करेगा. ट्रम्प को खुश करने के लिए मोदी जी देश की जनता को बर्बाद कर रहे हैं.
'पंपों पर मिले अपनी मर्जी का पेट्रोल चुनने का हक'
अरविंद केजरीवाल की सबसे पहली और बड़ी मांग यह है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को यह ऑप्शन मिलना चाहिए कि वे अपनी गाड़ी में कैसा पेट्रोल डलवाना चाहते हैं. सरकार इस समय पर्यावरण को बचाने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है. लेकिन केजरीवाल का मानना है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ प्योर पेट्रोल का विकल्प भी हमेशा मौजूद रहना चाहिए, ताकि जनता अपनी गाड़ी की जरूरत के हिसाब से खुद फैसला कर सके.
सरकार से मांगा जवाब-जब एथनॉल मिलाया, तो E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं?
अपनी दूसरी मांग में केजरीवाल ने एक बहुत ही व्यावहारिक आर्थिक मुद्दा उठाया है. उनका कहना है कि अगर पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जा रहा है, तो उसका सीधा फायदा आम जनता को मिलना चाहिए. एथनॉल का उत्पादन पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता होता है. ऐसे में केजरीवाल का तर्क है कि E20 पेट्रोल की कीमत प्योर पेट्रोल की तुलना में काफी कम होनी चाहिए. अगर मिलावट के बाद भी जनता को बराबर दाम चुकाना पड़े, तो फिर इस नए ईंधन का आम आदमी को कोई सीधा आर्थिक फायदा नहीं मिल रहा है.
इन दोनों मांगों के अलावा, केजरीवाल ने पेट्रोल की मूल कीमत पर भी बड़ा हमला बोला है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश में पेट्रोल की कीमत को घटाकर 84 रुपये प्रति लीटर से कम किया जाना चाहिए. पिछले कुछ समय में पेट्रोल-डीजल के दाम जिस तरह आसमान छू रहे हैं, उससे हर घर का बजट बिगड़ गया है. केजरीवाल का कहना है कि तेल के दामों में कटौती करके जनता को तुरंत महंगाई से राहत दी जानी चाहिए.
वहीं इस पूरे मामले पर विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कई पुरानी गाड़ियां ऐसी हैं, जिनके इंजन E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं. ऐसे में वाहन मालिकों को डर रहता है कि ब्लेंडेड पेट्रोल से उनकी गाड़ी का इंजन जल्दी खराब हो सकता है. केजरीवाल ने इसी डर और आम जनता की जेब पर पड़ने वाले असर को भांपते हुए यह मुद्दा उठाया है.
7 लाख लोगों ने देखा आप के प्रोग्राम का यूट्यूब लाइव
कांस्टीट्यूशन क्लब में हुए टाउनहॉल के दौरान आम आदमी पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर करीब 7 लाख (7,00,262) लोग एक साथ लाइव जुड़े. ठीक इसी समय पीएम मोदी मैसूर में जनसभा संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर करीब 3,324 लोग उनके लाइव में जुड़े थे.
सोशल मीडिया पर इसी स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि 'जनता अब मन की बात नहीं, अपने मन की बात सुनाने वाले नेता को सुन रही है'.
आम आदमी पार्टी का दावा है कि यह सिर्फ एक डिजिटल आंकड़ा नहीं, बल्कि ई-20 के खिलाफ देशभर के लोगों की बढ़ती नाराज़गी का संकेत है. पार्टी का कहना है कि लाखों लोगों ने इसलिए टाउनहॉल देखा क्योंकि वहां आम लोगों, मैकेनिकों, प्रोफेसरों, डिलीवरी राइडर्स और वाहन मालिकों की समस्याओं की मंच से चर्चा चल रही थी. लोगों ने माइलेज घटने, इंजन खराब होने, सर्विसिंग खर्च बढ़ने और पुरानी गाड़ियों पर ई-20 के असर जैसे मुद्दे उठाए.
आम आदमी पार्टी इसे 'दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल रैली' बता रही है. आप का दावा कर रही है कि यह साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया पर केवल राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि सीधे जनता के रोज़मर्रा के मुद्दों को उठा रहे हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि जब लाखों लोग स्वेच्छा से किसी नीति पर चर्चा सुनने के लिए जुड़ते हैं, तो यह सरकार के लिए चेतावनी है कि जनभावनाओं को अनदेखा करना आसान नहीं होगा.
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सोशल मीडिया 7 लाख vs 3 हजार का यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. समर्थक इसे जनता के बदलते मूड का संकेत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे अलग-अलग कार्यक्रमों और दर्शक व्यवहार का परिणाम मान रहे हैं. विपक्ष इसे भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष का प्रमाण बताकर लगातार निशाना बना रहा है.
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