दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए लागू पाबंदियों का असर अब निर्माण क्षेत्र से जुड़े दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर पड़ने लगा है. कंन्सट्रक्शन और धूल पैदा करने वाली एक्टिविटी पर सख्ती के बीच मजदूरों को रोजगार छिनने की चिंता सता रही है. कई मजदूर काम बंद होने की स्थिति में अपने गांव लौटने पर विचार कर रहे हैं.
दिल्ली में GRAP-II और सरकार के विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान के तहत प्रदूषण रोकने के उपाय किए जा रहे हैं. हालांकि, GRAP-II के तहत सभी तरह के कंन्सट्रक्शन कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन दिल्ली सरकार के अलग विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाले तोड़फोड़ और खुले में सिविल कंन्सट्रक्शन वर्क पर बैन लगाया गया है.
इसके अलावा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक 15 दिनों के लिए कुछ निर्धारित निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है.
मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि पाबंदियों के चलते उन्हें अपनी दैनिक मजदूरी छिनने का डर है. काम कम होने से कई मजदूर अपने गांव लौटने पर विचार कर रहे हैं. उनका कहना है कि निर्माण गतिविधियां दोबारा शुरू होने तक दिल्ली में रहकर गुजारा करना मुश्किल हो सकता है.
दिहाड़ी मजदूरों के लिए कुछ दिनों तक काम न मिलना भी बड़ी आर्थिक परेशानी बन सकता है. उनकी रोज की कमाई से ही घर का खर्च, किराया, भोजन और बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलता है. ऐसे में रोजगार रुकने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है.
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10 हजार रुपये की सहायता को लेकर असमंजस
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने निर्माण कार्यों पर पाबंदी से प्रभावित श्रमिकों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दिए जाने के बारे में सुना है. हालांकि, उन्हें यह जानकारी नहीं है कि सहायता राशि कब और कैसे मिलेगी. आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान की समयसीमा को लेकर भी मजदूरों में असमंजस बना हुआ है.
दरअसल, दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने प्रदूषण नियंत्रण के पिछले चरण में GRAP-III और GRAP-IV की पाबंदियों से प्रभावित पंजीकृत और सत्यापित निर्माण श्रमिकों को 10 हजार रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की थी. यह सहायता सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकृत श्रमिकों को सत्यापन के आधार पर दी जानी थी.
हालांकि, पिछली घोषणा के आधार पर मौजूदा GRAP-II या विंटर एक्शन प्लान से प्रभावित सभी मजदूरों को मुआवजा मिलने की पुष्टि नहीं होती है.
काम नहीं मिला तो दिल्ली छोड़ने की मजबूरी
कुछ मजदूरों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं तो उनके पास अस्थायी रूप से दिल्ली छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. इससे न केवल मजदूरों, बल्कि ठेकेदारों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े दूसरे लोगों पर भी असर पड़ सकता है.
शिवानी शर्मा