दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी को लेकर अवमानना याचिका, SC के आदेश के उल्लंघन का आरोप

मेट्रो के कई स्टेशन बंद रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि आदेश के बावजूद कुछ स्टेशनों के गेट बंद रखे गए. उन्होंने जीटीबी नगर स्टेशन का वीडियो सबूत के तौर पर देने की बात कही है.

Advertisement
दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंज करने पर SC में अवमानना याचिका दायर की गई है. (File Photo-PTI) दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंज करने पर SC में अवमानना याचिका दायर की गई है. (File Photo-PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:30 AM IST

दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगा है. इस मामले में अवमानना याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने कई स्टेशनों के गेट बंद रखे. याचिका में इसे कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अनदेखी बताया गया है.

Advertisement

दरअसल, यह मामला आज 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से जुड़ा है. कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस प्रदर्शन का ऐलान किया था. इसे देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और ट्रेनों के संचालन पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?

इस मामले में 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा था कि मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलाया जाए, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो.

यह भी पढ़ें: ट्रेन कैंसिल-मेट्रो स्टेशन बंद, इंटरनेट सस्पेंड और बॉर्डर पर BSF... CJP प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली की चौतरफा घेराबंदी

Advertisement

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें. कोर्ट ने माना कि प्रशासन को सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार है. लेकिन परिवहन सेवाएं पूरी तरह रोकने से आम यात्रियों, छात्रों और कामगारों को परेशानी हो सकती है. कोर्ट ने प्रशासन से आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा था.

 57 से घटाकर 45 किए गए थे स्टेशन

प्रशासन ने शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की योजना बनाई थी. बाद में इस संख्या को घटाकर 45 कर दिया गया. हालांकि, याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिबंधों के बावजूद कई स्टेशनों के गेट बंद रखे गए. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन की स्थिति का वीडियो सबूत के तौर पर देने की बात भी कही है. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी स्टेशन बंद रखना आदेश का उल्लंघन है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेट्रो स्टेशनों को बंद रखकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई. हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं. याचिका पर अदालत की आगे की कार्रवाई और इस मामले में उसका रुख अहम होगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: दिल्ली में निकलने से पहले पढ़ लें ट्रैफिक एडवाइजरी, जंतर-मंतर के आसपास डायवर्जन, 12 मेट्रो स्टेशन भी बंद

इस पूरे मामले में सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन का सवाल उठा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में साफ कहा था कि सुरक्षा के उपाय ऐसे होने चाहिए, जिनसे आम यात्रियों को बेवजह परेशानी न हो.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »