दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने के बाद परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि ऐसे मतदाता अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं. उन्हें इस बात से डरने की जरूरत नहीं है कि पहले से मतदाता होने के बावजूद यह फॉर्म भरने पर उनके खिलाफ गलत घोषणा करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई होगी.
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की पीठ ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस आशंका को गलतफहमी बताया कि फॉर्म-6 भरने से उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
दरअसल, याचिकाकर्ताओं के नाम पुराने पते से दूसरी जगह जाने और SIR के दौरान कैलकुलेशन फॉर्म पूरा नहीं हो पाने के कारण मतदाता सूची से हट गए थे. वे पहले मतदाता थे और मतदान भी कर चुके थे. ऐसे में उनके सामने सवाल था कि दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरें तो कहीं उन पर गलत जानकारी देने का आरोप न लग जाए.
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ने के लिए किया जाता है. इसमें आवेदक को घोषणा करनी होती है कि उसका नाम किसी अन्य मतदाता सूची में शामिल नहीं है. इसी शर्त को लेकर याचिकाकर्ताओं को कानूनी कार्रवाई का डर था.
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हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्देश पर चुनाव आयोग के वकील ने ही याचिकाकर्ताओं को फॉर्म-6 भरने का सुझाव दिया था. इसलिए इस आधार पर कानूनी कार्रवाई होने की आशंका निराधार है. कोर्ट ने कहा कि प्रभावित मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल पर फॉर्म-6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं. इन आवेदनों पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा.
नाम जुड़वाने के लिए क्या करें?
जिन मतदाताओं के नाम SIR के दौरान सूची से हटे हैं, वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, आवेदन जमा करने का मतलब नाम अपने आप जुड़ जाना नहीं है. संबंधित अधिकारी नियमों के मुताबिक आवेदन की जांच करेंगे. इस फैसले से उन मतदाताओं की चिंता दूर होने की उम्मीद है, जो पहले से वोट डालते रहे हैं, लेकिन नाम कटने के बाद दोबारा पंजीकरण कराने को लेकर असमंजस में थे.
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