दिल्ली के जंतर-मंतर में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर देश भर में चर्चा का माहौल है. कॉकरोच जनता पार्टी, प्रोटेस्टर्स, सरकार और पुलिस अपना पक्ष रख रही है. इस बीच यूपी के पूर्व डीजीपी का बयान भी सामने आया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद श्री बृजलाल ने आज शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
इस दौरान उन्होंने इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक पक्ष रखा. उन्होंने कहा है कि वे किसी सरकार या अदालत के प्रतिनिधि के रूप में बात करने नहीं आए हैं. वे अपने 38 साल के पुलिस सेवा के अनुभव के आधार पर जमीनी हकीकत सामने ला रहे हैं.
श्री बृजलाल ने एक चौंकाने वाला दावा किया. उन्होंने कहा कि इस छात्र आंदोलन के पीछे कुछ देश-विरोधी तत्व, असामाजिक लोग और तथाकथित 'डीप स्टेट' का हाथ था. विदेशी ताकतों के इशारे पर इस आंदोलन को भड़काकर दिल्ली में अराजकता फैलाने की साजिश रची गई थी. ऐसी तनावपूर्ण स्थितियों और भारी उकसावे के बावजूद दिल्ली पुलिस ने असाधारण संयम का परिचय दिया.
पूर्व डीजीपी बोले-पुलिस ने न्यूनतम बल का किया इस्तेमाल
कॉकरोच जनता पार्टी, छात्र संगठनों सहित आंदोलनकारियों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी. पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई और फिर जरूरत पड़ने पर वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया.
उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही पुलिस द्वारा कील लगी लाठियों के इस्तेमाल की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि पैलेट गन जैसे नॉन-लीथल हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए किया गया ताकि किसी की जान न जाए और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके.
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राज्यसभा सांसद श्री बृजलाल ने प्रदर्शन कर रहे निर्दोष और शांतिपूर्ण छात्रों के प्रति पूरी सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य यानी हमारे छात्रों और हिंसा फैलाने वाले आपराधिक तत्वों के बीच एक स्पष्ट लकीर खींची जानी चाहिए. जो लोग कानून हाथ में लेकर हिंसा में शामिल थे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होना तय है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में आंदोलन के बाद की तस्वीरों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'आंदोलन खत्म होने और समझौता होने के बाद भी पुलिस कमिश्नर के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं. संसद में बयानबाजी चल रही है. बिना जमीनी अनुभव के पुलिस पर एकतरफा आरोप लगाने से रात-दिन सुरक्षा में तैनात रहने वाले जवानों का मनोबल टूटता है. पुलिस को खलनायक की तरह पेश करने के बजाय समाज को उनके त्याग का सम्मान करना चाहिए.
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