दिल्ली से फुकेट आ रही एअर इंडिया की फुकेट से नई दिल्ली फ्लाइट के साथ हुए हादसे पर हर दिन नए खुलासे हो रहे है. इसी कड़ी में एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर AI2379 के साथ हुए हादसे को लेकर चौंकाने वाली टेक्निल रिपोर्ट सामने आई है.
शुरुआत में इसे केवल सामान्य टर्बुलेंस बताया गया था, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा डरावनी थी. हवा में वो 7 सेकंड ऐसे थे, जब विमान मौत के मुहाने पर पहुंच गया था. एक मामूली सी चूक से देश का सबसे बड़ा विमान हादसा हो सकता था.
दरअसल, घटना के समय प्लेन हवा में क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर था. ठीक 04:02:44 (GMT) बजने से ठीक पहले विमान का खौफनाक सफर शुरू हुआ. सबसे पहले फ्लाइट वार्निंग सिस्टम (FWS) ने ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने का अलर्ट किया.
प्लेन डिजाइन के नियमों के मुताबिक जब एक सिस्टम फेल होता है, तो तुरंत बैकअप के लिए ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम एक्टिव हो जाते हैं. लेकिन हैरानी और खतरे की बात यह रही कि महज एक से दो सेकंड के अंदर बाकी दोनों यानी ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम भी फेल हो गए. विमान के इतिहास में यह बेहद दुर्लभ पल था जब महज दो सेकंड के अंदर एक साथ तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम ठप हो गए.
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चार सेकंड तक बेकाबू रहा एअर इंडिया प्लेन
हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने का सीधा मतलब था विमान के सबसे अहम हिस्सों पर से पायलट का नियंत्रण खत्म हो जाना. एलिवेटर्स, एलेरॉन्स और स्पॉयलर्स जैसे जरूरी पार्ट्स ने काम करना बंद कर दिया. एलेरॉन्स फेल होने से पायलट के लिए प्लेन को बाएं या दाएं मोड़ने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई थी.
प्लेन के पंखों और हिस्सों को कंट्रोल करने वाले ये अहम कंपोनेंट्स लगातार 4 सेकंड तक पूरी तरह डेड रहे. कॉकपिट में बैठे पायलटों के लिए यह सिहरन पैदा करने वाला वक्त था. विमान का नोज (अगला हिस्सा) अचानक ऊपर की तरफ उठने लगा था. प्लेन को नीचे लाने और खतरनाक स्थिति से बचाने के लिए को-पायलट ने अपनी तरफ से साइड-स्टिक को नीचे यानी 'नोज-डाउन' की तरफ दबाया. लेकिन हाइड्रोलिक पावर न होने की वजह से विमान के फ्लाइट कंट्रोल्स ने उस इनपुट का कोई जवाब नहीं दिया.
प्लेन अपनी मर्जी से हवा में बेकाबू होकर झूल रहा था. इसी दौरान उसने अचानक करीब 300 फीट की अल्टीट्यूड ड्राप लगाई, जिससे केबिन में चीख-पुकार मच गई. कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हो गए.
तभी ठीक 04:02:51 (GMT) पर क्रू मेंबर और यात्रियों की किस्मत ने साथ दिया. जिन तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम (ग्रीन, ब्लू और येलो) ने काम करना बंद कर दिया था, वे अचानक अपने आप रिकवर हो गए और दोबारा एक्टिव हो गए.
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हाइड्रोलिक सिस्टम के पटरी पर आते ही को-पायलट की ओर से पहले दिया गया 'नोज-डाउन' कमांड अचानक प्रभावी हो गया. इसके बाद विमान ने तुरंत एक तेज नोज-डाउन ट्रैजेक्टरी पकड़ी और पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह विमान को संभालात.
गनीमत यह रही कि इसके बाद प्लेन सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कर गया और एक बड़ा हादसा टल गया.
एयरबस और DGCA की सख्त कार्रवाई, जांच जारी
इस डरावनी घटना के सामने आने के बाद विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने कड़ा रुख अपनाया है. एयरबस ने एयर इंडिया को इस विमान (AI2379) पर गंभीर तकनीकी परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं.
एअर का कहना है कि हाइड्रोलिक सिस्टम की 4 से 5 बार कड़ाई से जांच की जाए. ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम की पूरी चेकिंग हो. विमान की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी (ढांचे की मजबूती) की जांच की जाए. पिछले एक महीने के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम पर हुए मेंटेनेंस का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है.
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दूसरी ओर, इंडिया टुडे ने इस मामले में एयरबस और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को आधिकारिक सवाल भेजे हैं कि क्या भारत में उड़ने वाले सभी A320Neo बेड़े की विशेष जांच की सिफारिश की जाएगी?
अमित भारद्वाज