बिहार के 11 जिलों में तनाव, अबकी बार NDA में वापसी से नीतीश के 'सुशासन' पर सवाल?

जेडीयू के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जुलाई 2017 में आरजेडी का साथ छोड़कर NDA में हुए. तब नीतीश ने कहा था कि आरजेडी के साथ अब और आगे चलना उनके मुश्किल साबित हो रहा था. लेकिन जब से बिहार में बीजेपी के सहयोग से नीतीश की सरकार बनी है, तभी से सांप्रदायिक हिंसा की खबरें लगातार बढ़ती जा रही हैं.

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सुशील मोदी के साथ नीतीश कुमार (फाइल फोटो) सुशील मोदी के साथ नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

जेडीयू के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जुलाई 2017 में आरजेडी का साथ छोड़कर NDA में हुए. तब नीतीश ने कहा था कि आरजेडी के साथ अब और आगे चलना उनके मुश्किल साबित हो रहा था. लेकिन जब से बिहार में बीजेपी के सहयोग से नीतीश की सरकार बनी है, तभी से सांप्रदायिक हिंसा की खबरें लगातार बढ़ती जा रही हैं.

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बिहार के 11 जिलों में बवाल

'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक बिहार में जुलाई 2017 से अबतक कुल 2017 सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आ चुके हैं. इंडियन एक्स्प्रेस ने इस आंकड़े को बिहार पुलिस से हवाले से दिया है. यही नहीं, पुलिस के मुताबिक फिलहाल बिहार के 11 जिले सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में हैं. के मौके पर जुलूस को लेकर ये मामला और बढ़ गया.

अररिया से हिंसा की शुरुआत

दरअसल 14 मार्च को अररिया उपचुनाव में आरजेडी नेता सरफराज आलम की जीत के बाद सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत हुई, आरोप है कि जीत के बाद विजय जुलूस के दौरान भारत विरोधी और के नारे लगाए गए. वीडियो के आधार पर इस आरोप में पुलिस ने 3 लड़कों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद ये मामला राज्य के दूसरे में भी पहुंच गया और इसने बड़े पैमाने पर सांप्रदायिका हिंसा का रूप ले लिया.

आज बिहार के अररिया समेत 11 जिले हिंसा की चपेट में हैं. जिसमें  भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, नालंदा, नवादा, जमुई, बांका, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी शामिल हैं.

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आगे में हम आपके सामने एक आंकड़े रखने जा रहे हैं, जिससे से साफ होता है कि इस बार की एनडीए में वापसी से हिंसा के मामले में ज्यादा सामने आ रहे हैं. जबकि पिछली JDU-BJP सरकार के दौरान इससे एक चौथाई से कम मामले सामने आए थे.

- जुलाई 2017 से अबतक 270 सांप्रदायिक हिंसा के मामले थाने में दर्ज चुके हैं. जबकि केवल 2018 में 64 मामले सामने आए हैं.

- साल 2016 में जेडीयू और आरजेडी की सरकार थी, इस साल कुल 230 सांप्रदायिक हिंसा हुई थीं.

- इससे पहले साल 2015 में 155 हिंसा की खबरें पुलिस तक पहुंची थीं. इस साल भी जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी.

- साल 2014 में केवल 110 सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आए थे.

- साल 2013 में नीतीश कुमार NDA से अलग हुए थे और इस साल बिहार में कुल 112 सांप्रदायिक हिंसा के मामले दर्ज हुए थे.

- इससे पहले 2012 में केवल 50 और 2011 में 25 सांप्रदायिक हिंसा के मामले बिहार में हुए थे. इस दौरान भी NDA की सरकार थी.

- साल 2010 में NDA की सरकार बिहार में आई थी और इस साल सांप्रदायिक हिंसा के 50 मामले दर्ज हुए थे.        

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इस आंकड़े साफ होता है कि इससे पहले नीतीश और बीजेपी के साथ आने से बिहार में कानून-व्यवस्था के स्तर में सुधार हुआ था. और सांप्रदायिक हिंसा के बेहद कम मामले सामने आए थे. लेकिन पिछली जुलाई से अभी तक जो सांप्रदायिक हिंसा के आंकड़े सामने आए हैं वो नीतीश के सुशासन पर जरूर सवाल उठाता है.

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