नाना पाटेकर का आज सुबह तड़के 75 साल की उम्र में निधन हो गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था जो एक बेहद खतरनाक कंडीशन है. जी हां, हार्ट अटैक से कहीं ज्यादा भयानक और जानलेवा. ऑस्ट्रेलिया के नेशनल फाउंडेशन के अनुसार, हार्ट अचानक हंसते-खेलते व्यक्ति का जमीन पर गिर पड़ना, नब्ज बंद होना, आंखें बंद होना और सांस न आना, ये सभी कार्डियक अरेस्ट के शुरुआती और जानलेवा लक्षण हैं जिन्हें मामूली नहीं समझना चाहिए.
कार्डियक अरेस्ट में दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम काम करना बंद कर देता है जिससे दिल की धड़कन एक दम रुक जाती है और दिमाग और बाकी अंगों तक खून का बहाव बंद हो जाता है. हार्ट हेल्थ इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, भारत में होने वाली सभी मौतों में लगभग 10% सडन कार्डियक अरेस्ट के कारण होती हैं. दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में आधी भी कार्डियक अरेस्ट के कारण ही होती हैं.
कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अटैक से कम है सर्वाइवल रेट
आंकड़े बताते हैं कि अस्पताल के बाहर कार्डियक अरेस्ट आने पर मरीज के बचने की संभावना आमतौर पर केवल 8% से 10% ही होती है.
कार्डियक अरेस्ट के बाद हर बीतते मिनट के साथ मरीज के बचने का चांस 7% से 10% तक कम हो जाता है और 10 मिनट के अंदर मरीज ब्रेन डेड हो सकता है. लेकिन अगर पास में मौजूद इंसान तुरंत सीपीआर देना शुरू कर दे तो बचने की यह संभावना 40% से 50% तक बढ़ सकती है. आइए जानते हैं वो 1 काम जो किसी मरते हुए इंसान की जान बचा सकता है.
टाइमिंग करती है मैटर
बिना किसी मदद बचने का चांस: अगर मरीज को 10 मिनट तक कोई प्राथमिक इलाज न मिले तो बचने का चांस 1% से भी कम रह जाता है.
CPR है जीवनरक्षक
सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक ऐसी इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रक्रिया है जो तब की जाती है जब दिल धड़कना बंद कर देता है. कार्डियक अरेस्ट के बाद तुरंत सीपीआर से बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है.
मेडिकल टीम के पहुंचने तक बिना रुके मरीज की छाती के बीच में जोर-जोर से दबाएं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक मिनट में 100 से 120 बार छाती को दबाना चाहिए.
तुरंत सीपीआर मिलने पर बचने का चांस: अगर घटना के 1-2 मिनट के भीतर मरीज को सही तरीके से सीपीआर दिया जाए तो सर्वाइवल रेट बढ़कर 40% से 50% तक हो जाता है. जबकि हार्ट अटैक के मामलों में ये आंकड़ा 60 से 90 प्रतिशत है.
AED मिलने पर बचने का चांस: अगर सीपीआर के साथ-साथ 3-5 मिनट में इलेक्ट्रिकल शॉक मिल जाए तो बचने की संभावना 50% से 70% तक पहुंच जाती है. AED का मतलब है ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर. इसे शॉक देने वाली या धड़कन सुधारने वाली मशीन कहा जा सकता है.
कार्डियर अरेस्ट में इन 3 स्टेप्स को करें फॉलो
अगर कोई व्यक्ति आपके सामने गिर गया तो पहले उसके कंधे थपथपाएं और जोर से पूछें 'क्या आप ठीक हैं?. अगर कोई जवाब न मिले और सांस बंद हो या सिर्फ हांफने जैसी आवाज आए तो समझ जाएं कि कार्डियक अरेस्ट है इसलिए सबसे पहले हाथों से तुरंत सीपीआर देना शुरू करें.
किसी और व्यक्ति से तुरंत एम्बुलेंस बुलाने को कहें और पास में अगर AED मशीन उपलब्ध हो तो तुरंत मंगवाएं.
कैसे देते हैं तुरंत हैंड्स-ओनली सीपीआर
मरीज को फर्श या किसी कठोर सतह पर सीधा लिटाएं.
अपनी एक हथेली को मरीज की छाती के ठीक बीचों-बीच रखें और दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखकर उंगलियों को आपस में फंसा लें.
अपनी कोहनी एकदम सीधी रखें और अपने शरीर के वजन से छाती को 2 से 2.5 इंच नीचे तक दबाएं.
1 मिनट में 100 से 120 बार दबाने की रफ्तार रखें.
जब तक एम्बुलेंस या डॉक्टर न आ जाएं या मरीज खुद सांस न लेने लगे, बिना रुके लगातार सीपीआर देते रहें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क