बच्चे की डिलीवरी के बाद फेल हो गई मां की किडनी, प्लेटलेट्स भी गिरे, डॉक्टरों ने एक दवा से बचा ली जान

दिल्ली में एक महिला की डिलीवरी के बाद उसकी किडनी अचानक फेल हो गई. ऐसा एक गंभीर डिसऑर्डर जिसको एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम कहते हैं उसके कारण हुआ था, लेकिन गंभीर हालत में डॉक्टरों ने एक खास दवा से इस महिला की जान बचा ली.

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डिलीवरी के बाद किडनी फेल डिलीवरी के बाद किडनी फेल

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला के लिए जिंदगी का बेहद खास पल होता है, लेकिन कुछ मामलों में डिलीवरी के बाद अचानक ऐसी मेडिकल समस्या सामने आ सकती है, जिसका असर किडनी, खून और शरीर के दूसरे अंगों पर पड़ सकता है. ऐसा ही एक केस दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में आया. जहां बच्चे की डिलीवरी के बाद मां की किडनी फेल हो गई. इससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी, लेकिन इस गंभीर होती हालत में एक दवा महिला के लिए चमत्कार साबित हुई और उससे इलाज करने के बाद महिला का क्रिएटिनिन लेवल ठीक हो गया और दोबारा डायलिसिस की जरूरत भी नहीं पड़ी

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सर गंगाराम अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग में डॉ. वैभव तिवारी ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. डॉ वैभव बताते हैं कि इस केस में महिला को बच्चे की डिलीवरी के बाद अचानक से किडनी के फंक्शन खराब होने लगे थे. उसका क्रिएटिनिन बढ़ गया था और  प्लेटलेट्स के साथ- साथ हीमोग्लोबिन में भी खतरनाक गिरावट देखी गई थी. डॉक्टरों ने जब जांच की तो क्रिएटिनिन का लेवल करीब 7.0 mg/dL तक पहुंच गया. किडनी को सपोर्ट देने के डॉक्टरों को इमरजेंसी डायलिसिस तक करानी पड़ी. शुरुआत में ऐसी स्थिति को समझना चुनौतीपूर्ण हो गया था, क्योंकि डिलीवरी के आसपास कई गंभीर बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं. लेकिन तुरंत ही डॉक्टरों की टीम ने ये पता लगाया कि बीमारी का कारण क्या था. 

इस केस में महिला के कई प्रकार के टेस्ट किए गए. फिर जेनेटिक टेस्टिंग की गई. टेस्ट में महिला को एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम का पता चला. यह एक रेयर बीमारी है. इससे किडनी की छोटी नसों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच जाता है और छोटे-छोटे खून के थक्के बनने लगते हैं, इसका असर खासतौर पर किडनी पर पड़ता है.

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यह भी पढ़ें: टेस्ट में किडनी की पथरी का पता चले तो क्या करें? डॉक्टर से जानें आगे का सही इलाज 

टारगेटेड ट्रीटमेंट से मिली सफलता 

इस मामले में बीमारी की पहचान के बाद डॉक्टरों ने दवा Eculizumab से इलाज शुरू किया, यह C5 को ब्लॉक करके कंप्लीमेंट एक्टिवेशन के उस हिस्से को रोकती है, जो नसों को नुकसान पहुंचाने में भूमिका निभाता है. इस युवा महिला का भी ऐसे ही इलाज किया गया. इससे  धीरे-धीरे प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन सामान्य हुए. किडनी की कार्यक्षमता में भी सुधार आया और महिला का क्रिएटिटिन  करीब 1.4 mg/dL पर पहुंच गया, यानी जिस स्थिति में शुरुआत में इमरजेंसी डायलिसिस की जरूरत पड़ी थी, वहां से मरीज ने रिकवरी हासिल कर ली. 

डॉ. वैभव ने बताया कि एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम एक रेयर स्थिति है जिसमें तुरंत डायलिसिस की जरूरत पड़ती है. पहले इस बीमारी के इलाज के लिए खास दवाएं नहीं थी, लेकिन अब आ गई हैं. इस  Eculizumab दवा की मदद से ही इतनी गंभीर स्थिति में महिला की जान बचा ली गई. 

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डिलीवरी के बाद इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

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विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर बीमारी की पहचान करना है. अगर डिलीवरी के बाद महिला में पेशाब कम होना, अचानक सूजन, बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस फूलना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, प्लेटलेट्स कम है तो इसे सिर्फ सामान्य पोस्टपार्टम कमजोरी मानकर नहीं छोड़ना चाहिए.

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