भारत में फैटी लिवर की बीमारी के मामले काफी बढ़ रहे हैं. बड़ों से लेकर बच्चों तक को यह हो रही है. अगर लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जम जाता है तो यह बीमारी हो जाती है. फैटी लिवर में खानपान का काफी ध्यान रखना होता है. अधिक फैट वाली चीजें खाने से डॉक्टर मना करते हैं, लेकिन क्या इस बीमारी के मरीजों को दूध पीना चाहिए या नहीं यह भी कई लोगों के मन में सवाल आता है. इसके बारे में डायटिशियन ने बताया है.
क्लीनिकल डाइटिशियन शरा गुफरान बताती हैं कि फैटी लिवर के मरीज दूध पी सकते हैं, लेकिन उनको ज्यादा फैट वाले दूध को पीने से बचना चाहिए. फैटी लिवर वाले मरीजों के लिए टोंड या लो-फैट दूध लेना बेहतर होता है. क्योंकि इसमें अच्छा प्रोटीन मिलता है और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम होती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दूध ज्यादा मात्रा में न पीएं. आमतौर पर एक दिन में एक से दो बार दूध लिया जा सकता है.
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इन बातों का जरूर रखें ध्यान
दूध में चीनी, फ्लेवर्ड सिरप या मीठा मिल्क पाउडर न डालें. अगर मरीज को फैटी लिवर के साथ डायबिटीज, मोटापा, हाई ट्राइग्लिसराइड्स हैं या वजन कम करने की कोशिश कर रहा है, तो कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा व्यक्ति की जरूरत के अनुसार तय करनी चाहिए. दूध फैटी लिवर की डाइट का केवल एक हिस्सा है, लेकिन साथ में यह जरूरी है कि खानपान का भी ध्यान रखें. अपनी डाइट में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे शामिल करे.
शरा गुफरान कहती हैं कि फैटी लिवर की बीमारी में मरीजों को अपने खानपान का खास ध्यान रखना होता है. अगर ये ठीक नहीं है तो फैटी लिवर का ग्रेड बढ़ता रहता है और इससे सिरोसिस तक जैसी बीमारी हो सकती है, जो काफी खतरनाक होती है.
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फैटी लिवर के लक्षण
पेट में दर्द बने रहना
उल्टी होना
अपच
पहले की तुलना में भूख कम लगना
आजतक हेल्थ डेस्क