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फैटी लिवर

फैटी लिवर

फैटी लिवर

फैटी लिवर (Fatty Liver) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है. मेडिकल भाषा में इसे हेपेटिक स्टेटोसिस (Hepatic Steatosis) कहा जाता है. लिवर शरीर में भोजन को प्रोसेस करने, ऊर्जा को स्टोर करने और कई जरूरी रसायनों को बनाने जैसे महत्वपूर्ण काम करता है. ऐसे में लिवर में ज्यादा फैट जमा होना लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

फैटी लिवर मुख्य रूप से दो तरह का हो सकता है. पहला नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) और दूसरा शराब के अधिक सेवन से जुड़ा फैटी लिवर. NAFLD में शराब इसका मुख्य कारण नहीं होती. यह स्थिति अक्सर अधिक वजन, पेट के आसपास जमा फैट, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में बढ़े हुए ब्लड फैट जैसी स्थितियों के साथ देखी जाती है.

फैटी लिवर की खास बात यह है कि शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते. कुछ लोगों में थकान, कमजोरी या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता जैसी शिकायत हो सकती है. कई बार यह समस्या किसी दूसरी वजह से कराए गए अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट के दौरान पता चलती है.

अगर लिवर में फैट लंबे समय तक बना रहे और सूजन या लिवर को नुकसान होने लगे, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. कुछ मामलों में यह लिवर में फाइब्रोसिस और आगे चलकर सिरोसिस तक पहुंच सकती है.

फैटी लिवर की जांच के लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं. इलाज व्यक्ति की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है. वजन को स्वस्थ स्तर पर रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित भोजन लेना और शराब से बचना कई मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता है.

फैटी लिवर का पता चलने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा या सप्लीमेंट शुरू नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इसकी स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं.

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