Healthwealth summit: डेंगू में बुखार उतरते ही क्यों बढ़ जाता है खतरा? डॉक्टरों ने बताया बचाव और इलाज का सही तरीका

डेंगू के दौरान तेज बुखार और प्लेटलेट्स कम होने की चिंता सामान्य है, लेकिन बुखार उतरने पर भी सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि यह सबसे रिस्क वाला समय हो सकता है. डॉक्टरों ने ऑपरेशन ऑल आउट सत्र में बताया कि डेंगू किसी भी उम्र और फिटनेस के व्यक्ति को हो सकता है.

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अपने विचार रखते हुए प्रो. डॉ. संजीव बगाई  अपने विचार रखते हुए प्रो. डॉ. संजीव बगाई

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:03 PM IST

डेंगू होने पर सबसे बड़ा खतरा लोग प्लेटलेट्स कम होने को मानते हैं. लेकिन इस बीमारी में एक ऐसा समय भी आता है, जब मरीज को लगता है कि बुखार उतरने के साथ अब वह ठीक हो रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, यह डेंगू का क्रिटिकल फेज हो सकता है. इस दौरान अगर लापरवाही बरती और सेहत का ध्यान नहीं रखा तो कुछ मरीजों में हालत बिगड़ सकती है. इसलिए बुखार कम होने को बीमारी खत्म होने का संकेत नहीं मानना चाहिए.

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आजतक के हेल्थ वेल्थ समिट 2026 में 'ऑपरेशन ऑल आउट' सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने डेंगू के खतरे, वैक्सीन, इलाज और बचाव पर चर्चा की. इस दौरान प्रो. डॉ. संजीव बगाई और डॉ. सुशीला कटारिया ने बताया कि डेंगू किसी को भी हो सकता है. अगर कोई सोचता है कि वह फिट है और उसको डेंगू नहीं होगा तो ये सोचना सही नहीं है.

बुखार उतरने के बाद भी क्यों जरूरी है अलर्ट रहना

डेंगू में आमतौर पर बुखार 2 से 7 दिन तक रह सकता है. इसके बाद जब बुखार उतरने लगता है, लेकिन कुछ मरीजों में अगले 24 से 48 घंटे क्रिटिकल फेज हो सकते हैं. अगर बुखार उतरने के दौरान पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, कमजोरी, बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और शरीर में ठंडापन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए.

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डॉक्टरों के मुताबिक, केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर मरीज की गंभीरता तय नहीं की जा सकती. मरीज की पूरी स्थिति, ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग और अन्य जांचों को ध्यान में रखना जरूरी है.

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घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें

डॉ. संजीव बगाई ने डेंगू में सही समय पर इलाज और मेडिकल निगरानी की जरूरत पर जोर दिया. मरीजों को घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं रहना चाहिए और न ही बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेनी चाहिए. खासतौर पर एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. बुखार में पैरासिटामोल ही लें.

वैक्सीन के साथ मच्छरों से बचाव भी जरूरी

सत्र में डॉ. बगाई ने डेंगू वैक्सीन से जुड़े क्लिनिकल प्रमाण और उससे मिलने वाली सुरक्षा पर चर्चा की. वहीं डॉ. सुशीला कटारिया ने कहा कि वैक्सीन के बावजूद मच्छरों से बचाव जरूरी है. उन्होंने वाराणसी के पास पंडितपुर में चलाए गए 'ऑपरेशन ऑल आउट' जैसे अभियानों का भी जिक्र किया.

डॉक्टरों के मुताबिक, डेंगू से बचने के लिए सालभर मच्छरों को पनपने से रोकना जरूरी है. इसके लिए घरों में पानी जमा न होने दें, कूलर और गमलों की सफाई करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें. 

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