भारत में स्क्रीन देखने का बढ़ता चलन वैस्कुलर हेल्थ को खराब कर रहा है. वैस्कुलर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेस्क जॉब, ऑनलाइन गेमिंग, OTT प्लेटफॉर्म पर लगातार शो देखने से लोग घंटों बैठ रहे हैं. इससे पैरों की हलचल कम हो रही है और नसों में खून का बहाव कम हो रहा है, जिससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी समस्याएं हो रही हैं. वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया ने इसको लेकर लोगों को अलर्ट किया है.
डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की गहरी नसों में (आमतौर पर पैरों में) खून का थक्का जम जाता है, जिससे खून का सामान्य बहाव रुक सकता है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच सकता है और गंभीर रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे जान का खतरा भी हो सकता है. पहले DVT को बुढ़ापे या अस्पताल में भर्ती होने से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह स्वस्थ लोगों में भी देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कम एक्सरसाइज करना और अलग- अलग कारणों से घंटों बैठे रहने से ऐसा हो रहा है.
'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' में में प्रकाशित एक रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों में बैठे रहने की आदत सबसे ज्यादा थी, उनमें वीनस थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म (VTE) का रिस्क 24% ज़्यादा था य इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन भर में बैठे रहने की आदत में हर एक घंटे की बढ़ोतरी के साथ VTE का रिस्क 2% बढ़ जाता है. रिसर्च ने बताया कि बैठे रहने की आदत डीप वेन थ्रोम्बोसिस कर रही है.
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डॉक्टरों की ओपीडी में आ रहे इस तरह के मरीज
VSI-ASVS 2026 के ऑर्गनाइज़िंग सेक्रेटरी और मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर और हेड, डॉ. तापिश साहू ने बताया कि वह अपनी OPD में ऐसे युवा मरीजों को देख रहे हैं जिनमें ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जो डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसे हैं. डेस्क जॉब में लंबे समय तक बैठे रहना, ज्यादा स्क्रीन देखना और लंबे समय तक गेमिंग इसका कारण है.
पेरिफेरल वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर साइंसेज़ के सीनियर डायरेक्टर डॉ. तरुण ग्रोवर ने बताया कि उनकी OPD में वह ऐसे मरीज देख रहे हैं जिनमें वैस्कुलर टेस्ट करने की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में मरीज से ये पूछ रहे हैं कि वह डेस्क जॉब या OTT स्क्रीन के सामने कितने घंटे बिताते हैं? चूंकि ज़्यादा समय तक बैठे रहने से वेनस थ्रॉम्बोएम्बोलिज्म का रिस्क 24% बढ़ जाता है,तो इन आदतों को कम करने की जरूरत है. क्योंकि मरीजों को लगता है कि इसका कोई नुकसान नहीं है, जबकि ये शरीर में खून के थक्के बनने का कारण बन सकता है.
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लगातार बैठे रहना स्मोकिंग जितना खतरनाक
वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के सीनियर वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जन, डॉ. भूपेश गर्ग ने बताया कि जिस तरह स्मोकिंग से वैस्कुलर और क्लॉटिंग का खतरा बढ़ता है, उसी तरह लंबे समय तक बैठे रहने से भी ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ सकता है, भले ही इसका तरीका अलग हो. जब कोई व्यक्ति घंटों तक बैठा रहता है, तो पैरों की मांसपेशियों (काफ़-मसल पंप) की गतिविधि कम हो जाती है, पैरों से नसों के ज़रिए होने वाला ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है और गहरी नसों (डीप वेन्स) में खून जमा हो सकता है.
आजतक हेल्थ डेस्क