मोटापा आज के समय में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए लोग अक्सर बैरियाट्रिक सर्जरी जैसे महंगे और बड़े मेडिकल विकल्पों का सहारा लेते हैं. लेकिन इस सर्जरी के बाद शरीर पर पड़ने वाले असर और आने वाली दिक्कतों को लेकर मरीजों के अपने अलग अलग किसी के अच्छे तो कई कड़वे अनुभव होते हैं.
इसी साल 17 जुलाई को बैरियाट्रिक सर्जरी कराने वाली अपूर्वा प्रकाश मुखर्जी ने अपनी इस पूरी यात्रा और दर्दभरी आपबीती को खुलकर साझा किया है. स्लीव गैस्ट्रेक्टमी से लेकर उसके बाद शुरू हुई शारीरिक परेशानियों तक, अपूर्वा ने बताया कि कैसे उन्होंने यह फैसला लिया और इसके क्या परिणाम भुगतने पड़े.
यहां स्पष्ट कर दें कि हमारा उद्देश्य किसी भी चिकित्सा पद्धति या सर्जरी के प्रति कोई भ्रांति या डर फैलाना नहीं है. यह रिपोर्ट किसी डॉक्टर या मेडिकल क्लेम का विकल्प नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक मरीज का व्यक्तिगत और प्रामाणिक अनुभव है, जिसे हम अपूर्वा की जुबानी आप तक पहुंचा रहे हैं.
अपूर्वा की कहानी, उन्हीं की जुबानी
मैं अपूर्वा प्रकाश मुखर्जी हूं... मेरा वजन शादी के तीन साल बाद 105 किलो तक पहुंच गया था. डॉक्टरों की सलाह से अभी हाल ही में मैंने अपनी बैरियाट्रिक सर्जरी कराई है, इसी 17 जुलाई 2026 को. मैं इसके बारे में आप सभी से अपना अनुभव और अपनी दिक्कतें साझा करूंगी जो भी मेरी बहनें या मेरे भाई-दोस्त-साथी ओबेसिटी से जूझ रहे हैं, मैं आज एक-एक पॉइंट क्लियर करूंगी कि क्या ये सर्जरी करानी चाहिए या नहीं. तो चलिए, शुरू से शुरू करते हैं कि मैंने यह फैसला खुद के साथ क्यों लिया, अचानक ऐसा क्या हो गया था कि मुझे यह कराना पड़ा.
बहुत से लोगों को बैरियाट्रिक सर्जरी के बारे में नहीं मालूम, तो मैं आपको बताती हूं कि ये सर्जरी मुख्य रूप से तीन-चार प्रकार की होती है.
स्लीव गैस्ट्रेक्टमी: जिसमें आपका 80% पेट काटकर बाहर कर दिया जाता है (चर्बी नहीं निकाली जाती, क्योंकि बहुत से लोग पेट और चर्बी में अंतर नहीं कर पाते).
मिनी बाईपास सर्जरी: इसमें पेट का 20% हिस्सा काटकर एक छोटी सी थैली बनाई जाती है और उसे आंत के साथ जोड़ दिया जाता है. बाकी बचे पेट में चीरा लगाकर उसे साइड कर दिया जाता है, पर उसे रिमूव नहीं करते. चूंकि मेरी स्लीव गैस्ट्रेक्टमी हुई है, इसलिए मेरा 80% पेट काटकर बाहर कर दिया गया है.
मुझे ये सर्जरी क्यों करानी पड़ी?
साल 2025 में जनवरी में मैंने अपना फुल बॉडी चेकअप कराया था, जिसमें मुझे डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और फैटी लीवर निकला, जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था. इसी वजह से मेरा मोटापा भी समय के साथ बढ़ता गया. चूंकि जब से मेरी शादी हुई, उसके बाद से मैंने शरीर में काफी वजन बढ़ा लिया था और उसका एकमात्र कारण था, चिकनाई और खूब तला-भुना खाना. मैंने अपने ऊपर ध्यान नहीं दिया. 2025 बीता और 2026 में मेरी समस्या और बढ़ती चली गई. समय के साथ मुझे 'स्लीप एप्निया' की दिक्कत हो गई, जिसके कारण सोते समय मेरी नींद में 80%-90% तक ऑक्सीजन गिरने लगी थी, जो कार्डियक अरेस्ट का खतरा लाखों गुना बढ़ा रही थी.
मैंने 2025 में भी खूब ट्राई किया था, रोज 10,000 स्टेप्स वॉक करती थी. पर जैसे ही थोड़ा ठीक होने लगता, मेरा वजन बाउंस बैक हो जाता. मैंने डाइट भी करी और दूसरे कोर्स भी किए पर उससे भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ा. फिर मेरे इंस्टाग्राम पर बैरियाट्रिक सर्जरी का ऐड पिछले साल से कई बार पॉप-अप होने लगा. पिछले साल सोचा था कि कराऊं पर डर होता था कि दर्द होगा, दिक्कत होगी. चूंकि इस सर्जरी में मेरा अब तक 4 लाख तक का पूरा खर्चा आ चुका है और यह महंगी भी है तो पैसों का सोचकर मैंने पिछले साल मन भी मार लिया था.
फिर इस साल मुझे वह ऐड बार-बार दिखने लगा. मैंने मन बनाया और मेरठ में ही एक क्लीनिक में विजिट किया तो मुझे बताया गया कि आपका BMI बहुत हाई है और मेरी हाइट कम है, इसलिए सर्जरी मेरे लिए बेस्ट रहेगी. बस फिर क्या था, मेरा दिमाग ऐसा घूमा कि घर आकर मैंने अपने हसबैंड और अपने पापा को कई बार समझाया कि यह सर्जरी मेरे लिए क्यों सही है. वे मानना तो नहीं चाह रहे थे, पर शायद मेरी जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा.
सर्जरी के बाद की परेशानियां और मेरा कड़वा सच
जिस दिन मेरी सर्जरी हुई, उसके बाद से मुझे इतनी दिक्कतें हुईं कि शुरू के तीसरे दिन ही मुझे लूज मोशंस होने चालू हो गए, जिसके कारण मुझे डायरिया हो गया. उसके बाद से लेकर आज तक मुझे कब्ज की शिकायत रहने लगी. शुरू का एक महीना मैं केवल पानी पर ही रही, मेरे शरीर ने कुछ एक्सेप्ट ही नहीं करा, ना लिक्विड डाइट और ना ही सेमी-लिक्विड डाइट. मुझे इतनी दिक्कतें होने लगीं और मुझे बहुत-सी चीजें पहले नहीं बताई गई थीं कि ये-ये दिक्कतें आ सकती हैं. कहते हैं ना, हर कोई आपको अपनी गुडविल ही शो करता है. बस, मेरे साथ भी वही हुआ.
एक महीने बाद धीरे-धीरे मुझे सॉलिड डाइट पर लाया गया. उसके बाद तो मानो मेरी जिंदगी खत्म सी होने लगी, क्योंकि जैसे ही कुछ खाती (जो उन्होंने बताया था), तुरंत पूरे शरीर में स्वेलिंग और वाटर रिटेंशन होने लगता और डॉक्टर मानने को तैयार ही नहीं होते थे. फिर मैंने अपना डॉक्टर और डाइटीशियन दोनों चेंज किए. आज जाकर थोड़ी सी हालत में सुधार है. इस सर्जरी को कराने के बाद एक तो आपकी भूख बहुत छोटी हो जाएगी, आप 10 निवाले से ज्यादा एक बार में खा नहीं पाओगे. दूसरा, हर चीज खाने में अच्छी भी नहीं लगेगी. आपका पेट एक साल के बच्चे जैसा हो जाएगा.
मैं सभी से कहूंगी कि ये सर्जरी तब तक न कराएं जब तक वाकई कोई इमरजेंसी न हो. कोई भी डॉक्टर आपको अपना बिगड़े हुए केस के बारे में कभी नहीं बताएगा. वे सिर्फ आपको अपना अच्छा वाला साइड ही दिखाएंगे. जो गलती मैंने की, आप लोग ज्यादा चीजों को देख-परख कर ही इसे अपनाइए.
सर्जरी से लाइफ चेंज हो सकती है, नो डाउट... पर मुझे लगता है कि यह बेस्ट अल्टरनेटिव नहीं है. जो ओबेसिटी से जूझ रहा है, वे ओजेम्पिक या मोंजारो के साथ प्रॉपर डाइट ट्राई कर सकते हैं. डॉक्टर हमेशा आपको यह बताएंगे कि इससे इतने अच्छे रिजल्ट्स नहीं आते. जानते हो क्यों? क्योंकि इसमें पैसा धीरे-धीरे आता है और सर्जरी में वन-टाइम वाला हिसाब होता है.
इस कहानी से लें ये सबक
मोटापे से जंग लड़ रहे लोगों के लिए अपूर्वा प्रकाश मुखर्जी की यह दास्तान एक बड़ा सबक है. बैरियाट्रिक सर्जरी बेशक जिंदगी को नया मोड़ दे सकती है, लेकिन इसके साथ आने वाले शारीरिक और मानसिक संघर्ष आसान नहीं होते. सोशल मीडिया के विज्ञापनों और चमक-दमक से प्रभावित होने से पहले, किसी भी बड़े मेडिकल फैसले के हर पहलू को गहराई से समझना बेहद जरूरी है. अपूर्वा की यह कहानी यही याद दिलाती है कि सेहत से जुड़ा कोई भी कदम उठाने से पहले डॉक्टर की सही सलाह और पूरी जानकारी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है.
मानसी मिश्रा