4 साल के बच्चे जितनी लंबाई, उम्र 44 साल; AIIMS के डॉक्टरों ने की महिला की सर्जरी

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एक 44 साल की महिला की सर्जरी की गई है. इस महिला की लंबाई केवल 98 सेंटीमीटर और वजन 22 किलो था. सर्जरी के जरिए महिला का यूट्रस (गर्भाशय) निकाला गया है.

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 सर्जरी करने वाली दिल्ली एम्स की टीम सर्जरी करने वाली दिल्ली एम्स की टीम

अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों ने एक महिला की सर्जरी करके उसको नया जीवन दिया है. ये सर्जरी कोई आम केस नहीं था. जिस महिला का ऑपरेशन हुआ है उसकी लंबाई 98 सेंटीमीटर और वजन सिर्फ 22 किलो का था. महिला की शारीरिक बनावट और हड्डियों की गंभीर कमजोरी को देखते हुए सर्जरी के दौरान कई तरह की चुनौतियां थीं, हालांकि, डॉक्टरों की टीम ने महज 90 मिनट में ऑपरेशन करके उसका यूट्रस निकाला. महिला अब फिट है. सर्जरी के तीसरे दिन ही उसको एम्स से छुट्टी भी मिल गई है. 

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 महिला को पेल्विस यानी पेट के निचले हिस्से में काफी दर्द हो रहा था, इसकी प्रमुख वजह डीप एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस जैसी समस्याएं थीं. महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने गर्भाशय निकालने की सर्जरी की. इस महिला की उम्र 44 साल थी और इसको गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस और एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं थी. इस वजह से सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन खास तकनीक और सावधानी की मदद से टीम ने ऑपरेशन पूरा किया गया.

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क्यों आसान नहीं थी ये सर्जरी

दिल्ली एम्स (AIIMS New Delhi) का प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. रीता महाय और डॉ. स्वाति तोमर ने इस सर्जरी को लीड किया. डॉ रीता ने बताया कि इस महिला की हड्डियां बहुत कमजोर थीं. चूंकि महिला को ऑस्टियोपोरोसिस था तो इसलिए फ्रैक्चर का खतरा ज्यादा था.ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है,जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने से वे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं. ऐसी स्थिति में मामूली चोट या दबाव से भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ सकता है.

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महिला की लंबाई और वजन भी सामान्य से काफी कम थे. ऐसे में ऑपरेशन के दौरान उनके शरीर को सही स्थिति में रखना बेहद जरूरी था, ताकि हड्डियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े. इसके अलावा, एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा देने और सांस की नली को सुरक्षित रखने में भी विशेष सावधानी की जरूरत थी.

90 मिनट में पूरा हुआ ऑपरेशन

AIIMS की टीम ने महिला की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की योजना तैयार की. ऑपरेशन के दौरान शरीर को सपाट स्थिति में रखने की विशेष व्यवस्था की गई. इस सर्जरी में लैप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे चीरे लगाकर कैमरे और विशेष उपकरणों की मदद से सर्जरी की जाती है, इससे कई मामलों में दर्द कम होता है और मरीज की जल्दी रिकवरी हो जाती है. करीब 90 मिनट तक चली सर्जरी सफल रही. मरीज की रिकवरी अच्छी रही और उन्हें तीसरे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

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