झारखंड के रांची में 10 अगस्त को छात्रों के ‘विधानसभा मार्च’ के दौरान भारी बवाल देखने को मिला. पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच टकराव हुआ. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया. अब इसी प्रदर्शन का बताकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
वीडियो में एक व्यक्ति हाथ में पत्थर लेकर एक भीड़ के साथ आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. भीड़ को रोकने के लिए सड़क पर एक बैरिकेड लगा हुआ है. कुछ दूर जाने के बाद ये व्यक्ति बैरिकेड के दूसरी तरफ पत्थर फेंक देता है. भीड़ में से भी कुछ लोग कुछ फेंकते हुए नजर आ रहे हैं. इस भीड़ में कुछ लोगों के हाथ में बीजेपी के झंडे भी देखे जा सकते हैं.
वीडियो को शेयर करते हुए कुछ यूजर्स लिख रहे हैं कि इसमें दिख रहे लोगों ने रांची के शांतिपूर्ण आंदोलन में पत्थरबाजी करके उसे बदनाम करने की कोशिश की. एक व्यक्ति ने इसे रांची का बताकर फेसबुक पर लिखा, “शांतिपूर्ण आंदोलनों को हिंसक बनाने की क्रोनोलॉजी देश देख रहा है.”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि फरवरी का ये वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर का है और कांग्रेस-बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुए बवाल को दिखाता है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ‘द सूत्र’ नाम के यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो रिपोर्ट मिली. इसमें वायरल वीडियो वाला हिस्सा मौजूद है. ये रिपोर्ट 22 फरवरी की है. इससे एक बात तो यहीं साफ हो गई कि ये वीडियो हाल ही में हुए रांची प्रोटेस्ट से संबंधित नहीं हो सकता है.
द सूत्र की इस रिपोर्ट के मुताबिक ये वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर का है, जहां 21 फरवरी को कांग्रेस कार्यालय के बाहर बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई थी और दोनों तरफ से पथराव भी हुआ था.
कीवर्ड सर्च के जरिए हमें ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट्स मिलीं, जिनके मुताबिक, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विवादित 'शर्टलेस' प्रदर्शन को लेकर बीजेपी ने कई शहरों में कांग्रेस कार्यालयों का घेराव करने का ऐलान किया था.
इसी कड़ी में 21 फरवरी को इंदौर में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब बीजेपी के युवा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे और वहां पहले से मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनका आमना-सामना हो गया. दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी नारेबाजी हुई, जो देखते-ही-देखते हिंसक झड़प में बदल गई. प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थर, टमाटर और पानी की बोतलें फेंकी गईं, जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर और कुछ मीडियाकर्मी घायल हो गए थे. हालात संभालने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा.
न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पंधारीनाथ थाने में काउंटर एफआईआर दर्ज करते हुए सीसीटीवी फुटेज के जरिए जांच शुरू कर दी थी.
इंदौर के जिस चौराहे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच ये झड़प हुई थी, उस जगह को गूगल मैप्स पर भी देखा जा सकता है.
कुल मिलाकर साफ है कि इंदौर के एक पुराने वीडियो को रांची में हुए छात्र आंदोलन से जोड़कर झूठ फैलाया जा रहा है.
ऋद्धीश दत्ता