पंजाब के एक सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाते शख्स का वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इसमें एक व्यक्ति, एक सरकारी स्कूल में जाकर वहां के टॉयलेट्स, खासकर लड़कियों के टॉयलेट्स के खराब हालात दिखाता है.
वो बताता है कि लड़कियों के टॉयलेट्स में छत ही नहीं है और ना ही पानी की व्यवस्था है. कुछ लोग इसे अभी का बता रहे हैं और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना कर रहे हैं.
मिसाल के तौर पर वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “पंजाब में बेटियों के लिए नया फार्मूला. बच्चियां खुले आसमान के नीचे पेशाब जाएंगी. जी हां, ये मैं नहीं बोल रहा, पंजाब के लोग दिखा रहे हैं कि केजरीवाल के नए शिक्षा मॉडल की असल हकीकत क्या है. हे धूर्त, अगर PR से फुर्सत मिल गयी हो तो कम से कम बच्चियों की इज्जत से तो खिलवाड़ मत कर.”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो साल 2018 का है. उस वक्त पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये दास हरजीत सिंह नाम के यूट्यूब चैनल पर मिला. यहां इसे 6 अगस्त, 2018 को अपलोड किया गया था. इतनी बात तो यहीं साफ हो गई कि ये वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है.
साल 2018 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं थी. उस वक्त कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, और कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे.
इस यूट्यूब वीडियो के डिस्क्रिप्शन के मुताबिक, ये वीडियो फतेहगढ़ साहिब के Jallah गांव का है, और ये वीडियो ‘Serve Humanity Serve God’ नाम के एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने बनाया था. डिस्क्रिप्शन में ट्रस्ट का फोन नंबर भी मौजूद है.
इस नंबर पर हमारी बात दीपिका से हुई. उन्होंने बताया कि ये वीडियो उनके ही ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति ने बनाया था और स्कूल के हालात दिखाए थे.
साफ है कि ये वीडियो उस वक्त का है जब आम आदमी पार्टी सरकार में नहीं थी. हालांकि मौजूदा वक्त की बात करें, तो ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिनके मुताबिक सरकारी दावों के उलट आज भी पंजाब में कुछ स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं तक की कमी है. हालांकि पंजाब ने इस साल नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स-2026 में केरल को पछाड़कर टॉप रैंक हासिल की है.
आजतक की एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, फिरोजपुर के कुतुबपुरा में प्राथमिक स्कूल की बिल्डिंग को काफी पहले असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, फिर भी नर्सरी से पांचवीं तक के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं. पंखों और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच, इस साल दो महीनों में 12-13 बच्चों ने ये स्कूल छोड़ दिया. वहीं फरीदकोट के कोटकपुरा में एक प्राइमरी स्कूल सीमेंट की चादरों (रूफिंग शीट) के नीचे चल रहा है. बच्चे जून की गर्मी और मानसून की बारिश झेलने को मजबूर हैं. पीने के पानी के लिए केवल एक टूटा हुआ नल है.
हिंदुस्तान टाइम्स की 30 अगस्त, 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ सर्वेक्षण रिपोर्ट 2024-25 में सामने आया था कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. राज्य के सरकारी स्कूलों में कुल नामांकन शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 28.23 लाख था, जो 2024-25 में घटकर 26.69 लाख रह गया. यानी करीब 1.5 लाख छात्र कम हो गए थे.
इंडियन एक्सप्रेस की 4 अगस्त, 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के सरकारी स्कूलों में विभिन्न कैडरों में शिक्षकों के 31,370 पद खाली हैं. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कांग्रेस विधायक और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के सवाल के जवाब में ये आंकड़ा सदन में पेश किया. इसमें भी सबसे ज्यादा कक्षा 6 से 10 वाले कैडर में कुल 20,378 पद खाली हैं.
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 18 अगस्त को एक एक्स पोस्ट के जरिए वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे दावों का खंडन किया था. वो Jallah के इस स्कूल में गए और वहां की तस्वीरें शेयर कीं.
ये बात सही है कि वायरल हो रहा वीडियो पुराना है, लेकिन वर्तमान में इस स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर, टॉयलेट्स और बाकी स्थिति कैसी है, इस बारे में हम पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कह सकते हैं.
फैक्ट चेक ब्यूरो