मौत की सजा से बच पाएंगे 8 भारतीय? जानें कतर के फैसले के खिलाफ भारत के पास क्या हैं कानूनी विकल्प

पिछले साल कतर में गिरफ्तार हुए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई है. कतर की अदालत के इस फैसले पर भारत सरकार ने हैरानी जताई है. साथ ही कहा है कि भारतीयों की रिहाई के लिए सभी कानूनी विकल्प तलाशे जा रहे हैं. जानते हैं कि अब भारत के पास क्या रास्ते हैं?

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फाइल फोटो फाइल फोटो

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

कतर की अदालत ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई है. इन आठों भारतीयों को पिछले साल जासूसी के कथित आरोप में गिरफ्तार किया गया था. 

भारत सरकार ने इस फैसले पर हैरानी जताई है. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, 'कतर की अदालत ने आज अल-दहरा कंपनी के आठ भारतीय कर्मचारियों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है. मौत की सजा के फैसले से हम हैरान हैं. और फैसले की डिटेल्ड कॉपी का इंतजार कर रहे हैं. हर परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के संपर्क में हैं. भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए सभी कानूनी विकल्पों की तलाश की जा रही है.'

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विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि कतर की जेल में बंद भारतीय नागरिकों को कॉन्सुलर एक्सेस और कानूनी मदद दी जाती रहेगी.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर लिखा, 'कांग्रेस उम्मीद करती है कि भारत सरकार कतर सरकार के साथ अपने राजनयिक और राजनीतिक प्रभाव का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेगी, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अपील का पूरा मौका मिले. और उनकी जल्द से जल्द रिहाई के लिए हर जरूरी कोशिश की जाए.'

बहरहाल, फैसला आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि इस मामले को कतर के अधिकारियों के सामने भी उठाया जाएगा.

अब क्या है आगे का रास्ता?

इस मामले में अब आगे का रास्ता क्या है? इस बारे में सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और ICCPR के प्रावधान कहते हैं कि कुछ मामलों को छोड़कर आम तौर पर फांसी की सजा नहीं दी जानी चाहिए.

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उन्होंने बताया कि भारत के पास कई रास्ते हैं. पहला तो यही कि इस फैसले को कतर की ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है. अगर उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है या अपील नहीं सुनी जाती है तो भारत इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी जा सकता है.

आनंद ग्रोवर बताते हैं कि मौत की सजा को रोकने के लिए भारत राजनयिक स्तर पर दबाव भी बना सकता है. 

इतना ही नहीं, एनजीओ और सिविल सोसायटी भी इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठा सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र के पास जाने का रास्ता भी भारत के पास है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नौसेना के इन आठ पूर्व अफसरों को पिछले साल अगस्त में हिरासत में लिया गया था. 

कौन हैं ये भारतीय?

नेवी के जिन आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई है, उनके नाम- कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदू तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और राजेश हैं.

इन सभी पूर्व अफसरों ने भारतीय नौसेना में 20 साल तक सेवा दी थी. नेवी में रहते हुए उनका कार्यकाल बेदाग रहा है और अहम पदों पर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

पिछले साल 25 अक्टूबर को मीतू भार्गव नाम की महिला ने ट्वीट कर बताया था कि भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसर 57 दिन से कतर की राजधानी दोहा में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में हैं. मीतू भार्गव कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की बहन हैं. 

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इन अफसरों पर कथित तौर पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप है. कतर की न्यूज वेबसाइट अल-जजीरा के रिपोर्ट के मुताबिक, इन अफसरों पर कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारियां इजरायल को देने का आरोप है.

हालांकि, कतर सरकार की ओर से इन पूर्व अफसरों पर लगाए गए आरोपों को लेकर कुछ खास जानकारी भारत सरकार के साझा नहीं की गई है. 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के मुताबिक, इस साल 29 मार्च को इन पूर्व अफसरों के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ था. तीन अक्टूबर को मामले में सातवीं सुनवाई हुई थी.

कतर में कर क्या रहे थे ये अफसर?

नौसेना से रिटायर्ड ये सभी अफसर दोहा स्थित अल-दहरा कंपनी में काम करते थे. ये कंपनी टेक्नोलॉजी और कंसल्टेसी सर्विस प्रोवाइड करती थी. साथ ही कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और सामान भी मुहैया कराती थी.

इस कंपनी को ओमान की वायुसेना से रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खमीस अल आजमी चलाते थे. पिछले साल उन्हें भी इन भारतीयों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि, नवंबर में उन्हें रिहा कर दिया गया था.

ये कंपनी इस साल 31 मई को बंद हो गई है. इस कंपनी में लगभग 75 भारतीय नागरिक काम करते थे, जिनमें ज्यादातर नौसेना के पूर्व अफसर थे. कंपनी बंद होने के बाद इन सभी भारतीयों को नौकरी से निकाल दिया गया.

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