'इस्लाम में वर्शिप और प्लेस का कॉन्सेप्ट ही नहीं...', वर्शिप एक्ट पर सुधांशु त्रिवेदी ने उठाए सवाल

Agenda Aaj Tak 2024 Sudhanshu Trivedi: बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर कहा कि मुस्लिम समुदाय में वर्शिप का कॉन्सेप्ट नहीं है, बल्कि प्रार्थना का कॉन्सेप्ट है. उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि क्या इस कानून में जम्मू कश्मीर की उस मस्जिद कवर नहीं है, जिसे ढहा दिया गया था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस मंदिर के 1947 के स्टेटस को बहाल किया जाएगा?

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बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

Agenda Aaj Tak 2024: एजेंडा आजतक के मंच पर 'मामला लीगल है' सेशन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस के लोकसभा सदस्य इमरान मसूद शामिल हुए. लखनऊ की टीले वाली मस्जिद, वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद से लेकर अजमेर शरीफ तक, मंदिर-मस्जिद का मामला कोर्ट में है. इन सबको लेकर सवाल पर डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट गजब का कानून बना था.

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सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "इसमें इसकी कोई डेफिनिशन ही नहीं है. इस्लाम में तो वर्शिप का कॉन्सेप्ट ही नहीं है, प्रेयर का कॉन्सेप्ट है. इस्लाम में प्लेस का भी कॉन्सेप्ट नहीं है. उपासना स्थल कानून, उपासना स्थल का तो कॉन्सेप्ट ही नहीं है. यह विचित्र कानून है. मुलायम सिंह की सरकार ने ज्ञानवापी तहखाने में पूजा रोकी थी. कश्मीर में मंदिर तोड़ दिए गए थे. 1947 का तो स्टेटस ही कुछ और है."

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बीजेपी सांसद ने कहा, "ऐसा बेहतरीन फ्रेमवर्क और लीगल देखिए, वक्फ बोर्ड को ये अधिकार दे दिया गया कि तुम कह दो तो वह तुम्हारा हो जाएगा और कोई कोर्ट भी नहीं जाएगा. इस्लाम में लीगल ही नहीं है. पेशावर हो या चरारे शरीफ, सीधे धमाका होता है."

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बेरोजगारी, महंगाई और किसान की समस्याओं पर बात क्यों नहीं?

इमरान मसूद ने कहा कि हम कब तक मंदिर-मस्जिद के झगड़े में फंसे रहेंगे. हम बेरोजगारी, महंगाई और किसान की समस्याओं पर बात क्यों नहीं करते. इस हिंदुस्तान से 25 करोड़ मुसलमानों को साइडलाइन लगाकर क्यों और कहां भेजना चाहते हैं. हम तो छोटे भाई हैं. मोहब्बत से रहना चाहते हैं. हाथ जोड़कर विनती करते हैं, मोहब्बत से रहने दीजिए.

अगर वक्फ को लगे जमीन हमारी तो...!

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "वक्फ बोर्ड एक्ट में ये साफ लिखा है कि अगर वक्फ को लगे के जमीन हमारी है तो वो सीधे डीएम को आदेश कर सकता है कि एक्शन लेने के लिए. उन्होंने सवाल किया कि आखिर कौन सी ऐसी संस्था है जिसे सीधे डीएम को आदेश देने का अधिकार है. ये लीगल पावर दी गई.

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सूरत नगर निगम की जमीन पर दावा इस आधार पर है कि मुगलों के समय ये जमीन सराय थी और तब उस जमीन को वक्फ कर दी गई थी. 15 अगस्त 1947 के बाद वो दावा है, 12 साल की टाइटल सूट की अवधि को हटा दिया गया है, कर्नाटक के एक मंदिर पर नवाबों के दौर में दान मिलने का जिक्र कर वक्फ ने दावा किया और उसे वक्फ की जमीन घोषित कर दी गई. 

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