पाकिस्तानी ड्रामे, गाने और फैशन... Gen Z ख़त्म कर रहे दो देशों की दूरी!

भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद, जेन जी पाकिस्तानी गानों, ड्रामों और फैशन में इंटरेस्ट दिखा रही है. नुसरत फतेह अली खान के गानों से लेकर ‘पसूरी’ और पाकिस्तानी टीवी सीरियल तक, क्या है इस पसंद की वजह? जानिए कैसे सोशल मीडिया, मिलती-जुलती भाषा और कल्चर दोनों देशों के युवाओं को जोड़ रहे हैं.

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इंडियन जेन जी को इतना क्यों भाता है पाकिस्तानी म्यूजिक और ड्रामा? इंडियन जेन जी को इतना क्यों भाता है पाकिस्तानी म्यूजिक और ड्रामा?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

बात जब भारत और पाकिस्तान की होती है लोगों के दिमाग में पहला ख्याल लड़ाई और दुश्मनी का ही आता है. लेकिन क्या बॉर्डर के दोनों तरफ के जेन जी म्यूजिक, ड्रामा और फैशन से इस दूरी को कम कर रहे हैं. जिस तरह से भारत की ऑडियंस पाकिस्तानी ड्रामा को पसंद करती हे, उसे पाकिस्तानी ड्रामा अपनी तरफ क्यों खींचता हैं?

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रेशमा और नुसरत फतेह अली खान के गानों से लेकर दर-ए-निजात, मिट्टी दे बावें और पंजाबी इंडी म्यूजिक तक, भारतीय युवाओं के बीच पाकिस्तानी कल्चर को लेकर इंटरेस्ट बढ़ रहा है. दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद, जेन जी म्यूजिक, टीवी सीरियल और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे की कल्चर से जुड़ रही है.

पाकिस्तानी गाने और ड्रामे क्यों पसंद कर रही है जेन जी?

भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद, दोनों देशों के कल्चर आज भी लोगों को जोड़ती है. खासकर जेन जी पाकिस्तानी गानों, टीवी ड्रामों और फैशन में इंटरेस्ट दिखा रही है. सोशल मीडिया और इंटरनेट ने इस इंटरेस्ट को और बढ़ाया है.

गानों से लेकर ड्रामों तक बढ़ रही इंटरेस्ट

पाकिस्तानी म्यूजिक भारतीयों के लिए नया नहीं है. नुसरत फतेह अली खान, राहत फतेह अली खान और आतिफ असलम जैसे आर्टिस्ट के गाने लंबे टाइम से भारत में पसंद किए जाते रहे हैं. अब नई जेनरेशन भी पाकिस्तानी म्यूजिक को सुन रही है.

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‘पसूरी’ जैसे गाने भी भारत में काफी पॉपुलर हुए. वहीं, पाकिस्तानी गानों के छोटे वीडियो और रील्स सोशल मीडिया पर लोगों तक पहुंच रहे हैं. इससे कई ऐसे गाने भी युवाओं की प्लेलिस्ट में शामिल हो रहे हैं, जिनके बारे में उन्होंने पहले नहीं सुना था.

पाकिस्तानी ड्रामों का भी क्रेज

सिर्फ गाने ही नहीं, पाकिस्तानी ड्रामे भी भारतीय ऑडियंस का ध्यान खींच रहे हैं. ‘हमसफर’ और ‘जिंदगी गुलजार है’ जैसे ड्रामों के बाद अब नई जेनरेशन भी पाकिस्तानी कहानियों और आर्टिस्ट में इंटरेस्ट ले रही है.

‘दर-ए-निजात’ और ‘मिट्टी दे बावय’ जैसे ड्रामों की चर्चा भी इस इंटरेस्ट को दिखाती है. इन कहानियों, आर्टिस्टों और उनके अंदाज को लेकर जेन जी सोशल मीडिया पर बात करते हैं.

सोशल मीडिया ने आसान की पहुंच

पहले दूसरे देश के आर्टिस्ट और उनके काम को जानने के मौके सीमित थे. अब यूट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की हेल्प से लोग आसानी से नए गाने, ड्रामे और फैशन ट्रेंड खोज सकते हैं.

भारत और पाकिस्तान की भाषा, म्यूजिक और कई कल्चर से जुड़ी परंपराओं में भी समानताएं हैं. पंजाबी म्यूजिक और उर्दू शायरी इसका उदाहरण हैं. यही वजह है कि कई गाने और कहानियां युवाओं को जानी-पहचानी लगती हैं.

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