Ranabaali: भूख से मरे लाखों लोग, अंग्रेजों का कैसा था वो खूनी दौर? विजय की रणबाली में दिखेगा सच!

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म रणबाली में दिखेगा 1876-78 के भयानक अकाल का दौर. जानिए लाखों मौतों, अंग्रेजों की नीतियों और विद्रोह की 6 ऐतिहासिक बातें.

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रणबाली की असली कहानी क्या? (Photo: Screengrab) रणबाली की असली कहानी क्या? (Photo: Screengrab)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:26 AM IST

Ranabaali Film 6 Facts: विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘रणबाली’ सिर्फ एक योद्धा की कहानी नहीं, बल्कि अंग्रेजों के शासन में भारत के उस दर्दनाक दौर की झलक भी दिखाएगी, जब सूखे, भुखमरी और सख्त सरकारी नीतियों ने लाखों लोगों की जिंदगी छीन ली थी.

साउथ सिनेमा के सितारे विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाले हैं. उनकी ऐतिहासिक फिल्म ‘रणबाली’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. फिल्म की कहानी ब्रिटिश शासन के दौरान 1876 से 1878 के बीच पड़े भीषण अकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है. आइए, जानते हैं उस दौर की 6 ऐसी बातें, जिन्हें जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.

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जब सूखे ने छीन लिया लाखों लोगों का निवाला

1876 से 1878 के बीच भारत के बड़े हिस्से में भयंकर अकाल पड़ा था. इसे ग्रेट फेमिन या मद्रास फेमिन के नाम से भी जाना जाता है. दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाके इसकी चपेट में आ गए थे. बारिश नहीं हुई, खेत सूख गए और फसलें बर्बाद हो गईं. खेती पर निर्भर परिवारों की आमदनी खत्म हो गई. हालात ऐसे हो गए कि लोगों के सामने दो वक्त का खाना जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया.

रायलसीमा में मचा था मौत का तांडव

आज के आंध्र प्रदेश का रायलसीमा क्षेत्र इस अकाल से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल था. लगातार सूखे ने खेती को पहले ही कमजोर कर दिया था और 1876 में मानसून की नाकामी ने हालात और बिगाड़ दिए. भोजन की कमी के साथ-साथ बीमारियों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं. द बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रायलसीमा में करीब सात लाख लोगों की जान जाने का अनुमान है.

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आखिर कितने लोगों की गई जान?

इस अकाल में मरने वालों की सही संख्या आज भी इतिहासकारों के बीच अलग-अलग अनुमानों का विषय है. इसकी वजह यह है कि अलग-अलग रिपोर्टों में भौगोलिक क्षेत्र और समयावधि का दायरा अलग रखा गया है. ‘रणबाली’ के ट्रेलर में आठ मिलियन यानी 80 लाख मौतों का जिक्र किया गया है. कुछ ऐतिहासिक विवरण पूरे अकाल से जुड़ी मौतों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा बताते हैं, जबकि बीबीसी के एक अनुमान के अनुसार, मद्रास अकाल में करीब 40 से 50 लाख लोगों की जान गई थी.

आंकड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन यह साफ है कि यह ब्रिटिश शासन के दौर की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था.

अंग्रेजों की नीतियों पर क्यों उठे सवाल?

अकाल की बड़ी वजह सूखा और फसलों की बर्बादी थी, लेकिन इसके बढ़ने में ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं. ऐतिहासिक विवरणों में बताया गया है कि खाद्यान्न की कमी के बावजूद अनाज का निर्यात जारी रहा. वहीं, सरकार की नीतियों में बाजार के जरिए अनाज की आपूर्ति पर जोर था. आलोचकों का मानना है कि जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए पर्याप्त सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ.

यानी संकट सिर्फ अनाज की कमी का नहीं था, बल्कि यह भी अहम था कि भूखे लोगों तक खाना पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए गए.

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राहत के नाम पर भी लोगों को झेलनी पड़ी मुश्किलें

अकाल राहत के कामकाज को लेकर ब्रिटिश प्रशासन की काफी आलोचना हुई थी. सर रिचर्ड टेम्पल ने राहत व्यवस्था की निगरानी की और सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए. ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, राहत शिविरों में मिलने वाले भोजन की मात्रा पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे. कुछ विवरणों में यह भी कहा गया है कि अकाल पीड़ितों को मिलने वाला भोजन कभी-कभी कोलोनियल जेलों में कैदियों को दिए जाने वाले भोजन से भी कम कैलोरी वाला था. भूख से जूझ रहे लोगों के लिए राहत शिविर भी हर बार पर्याप्त सहारा साबित नहीं हुए.

जब भूखे लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ उठाई आवाज

अकाल के दौरान हर कोई चुपचाप अपनी किस्मत को कोसता नहीं रहा. कुछ ऐतिहासिक विवरणों में गांवों के लोगों द्वारा कर वसूली का विरोध करने, जमा अनाज पर कब्जा करने और स्थानीय विद्रोहों में हिस्सा लेने की घटनाओं का जिक्र मिलता है.

ब्रिटिश अधिकारी ऐसी कई गतिविधियों को अपराध या बगावत के रूप में देखते थे. हालांकि, रायलसीमा की कुछ स्थानीय परंपराओं और लोककथाओं में ऐसे लोगों को अपने समुदाय की रक्षा करने वालों के तौर पर याद किया जाता है. यही वह दौर था, जब भूख और बेबसी के बीच विरोध की आवाजें भी उठ रही थीं.

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क्या है ‘रणबाली’ की कहानी?

राहुल सांकृत्यायन के डायरेक्शन में बनी ‘रणबाली’ में विजय देवरकोंडा मुख्य किरदार निभा रहे हैं, जबकि रश्मिका मंदाना उनकी पत्नी जयम्मा के रोल में नजर आएंगी. फिल्म का निर्माण मैत्री मूवी मेकर्स ने किया है.

कहानी एक ऐसे योद्धा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ खड़ा होता है और अपने लोगों की रक्षा करने की कोशिश करता है. ऐसे में फिल्म का ऐतिहासिक बैकग्राउंड इसे सिर्फ एक एक्शन ड्रामा नहीं, बल्कि औपनिवेशिक दौर के संघर्ष और आम लोगों की तकलीफों से जुड़ी कहानी भी बनाता है.

16 अक्टूबर 2026 को रिलीज होने वाली ‘रणबाली’ से अब दर्शकों को यह देखने की उम्मीद होगी कि फिल्म इस दर्दनाक ऐतिहासिक दौर, भूख से जूझते लोगों और विरोध की कहानियों को बड़े पर्दे पर किस तरह पेश करती है.

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