Bhojpuri Bawaal Review: नहीं उड़ा गर्दा, फैमिली ड्रामे का ओवरडोज-पवन सिंह की इमेज पॉलिशिंग के बोझ तले दबा शो

Bhojpuri Bawaal Review: भोजपुरी सितारों की मौजूदगी किसी भी शो को हिट कराने की गारंटी समझा जाता है. जब पूरा शो ही भोजपुरी सितारों से सजा हो, तो बवाल मचना तो तय है. यही वजह है कि जब भोजपुरी बवाल शो आया था, तो माना जा रहा था कि ये हर दूसरे रियलिटी शो पर भारी पड़ेगा और टीआरपी में गर्दा उड़ा देगा, लेकिन इतना बवाल मचता नजर नहीं आया.

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भोजपुरी बवाल का रिव्यू (Photo: Instagram/jiohotstarreality) भोजपुरी बवाल का रिव्यू (Photo: Instagram/jiohotstarreality)

नेहा फरहीन

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज सितारे एक ही छत के नीचे हों और माहौल में गर्दा न उड़े, ऐसा सोचना भी नामुमकिन सा लगता है. जब 'भोजपुरी बवाल' का ऐलान हुआ था, तो लगा था कि यह रियलिटी शो टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा. लेकिन अफसोस भारी-भरकम स्टारकास्ट के बावजूद गर्दा उड़ाने के बजाय पर्दे पर उतरते ही शो की हवा निकल गई. गर्दा उड़ाने का वादा करने वाला यह शो आखिरकार ‘देसी ब्लिंग’ की एक थकी हुई और सस्ती कॉपी बनकर सिमट गया है. 

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इमेज चमकाने की वर्कशॉप
शो का सबसे बड़ा ब्लंडर इसका पटरी से पूरी तरह उतर जाना है. दर्शकों को हाई-वोल्टेज ड्रामे और एंटरटेनमेंट की उम्मीद थी, लेकिन मेकर्स ने इसे 'पावर स्टार' पवन सिंह का पर्सनल 'इमेज मेकओवर प्रोजेक्ट' बनाकर रख दिया. स्क्रीन पर मनोरंजन परोसने के बजाय पवन सिंह शो में अपनी पुरानी गलतियों, विवादों पर सफाइयां देने और खुद को बेगुनाह साबित करने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं.

एंटरटेनमेंट के शो में पवन सिंह अपनी मां को लाकर इमोशनल कार्ड खेलते दिखे. मां की सेवा करके खुद को एक आदर्श और संस्कारी बेटे के सांचे में ढालने की उनकी कोशिश तो अच्छी है, लेकिन पवन सिंह शायद यह भूल गए कि जनता यहां फैमिली ड्रामा देखने नहीं, बल्कि असली रियलिटी शो का मजा लेना चाहती है. 

तेज प्रताप का दिखा अलग अंदाज
राजनीति से अलग तेज प्रताप यादव का ठेठ बिहारी अंदाज और निजी जिंदगी की झलक शुरुआत में किसी सरप्राइज से कम नहीं थी. लेकिन फिर पारिवारिक विवादों और दुखों पर बार-बार रोना दर्शकों के लिए सिरदर्द बन गया. शो में वो ज्यादातर पिता, भाई संग अपने बिखरे रिश्तों पर बात करते दिखते हैं, जो एक पल के बाद बोरिंग सा लगने लगा है. हालांकि, जब वो मल्लिका शेरावत के साथ बेफिक्र अंदाज में फ्लर्ट करते हैं या बांसुरी बजाते हैं, तो शो में थोड़ी ताजगी और मनोरंजन जरूर देखने को मिलता है. राजनीति से अलग उन्हें मस्तीभरे अंदाज में देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है. 

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काजल राघवानी खेल रहीं विक्टिम कार्ड
काजल राघवानी ने शो में एंट्री तो दमदार ली थी, लेकिन अब वो हर एपिसोड में सिर्फ 'विक्टिम कार्ड' खेलती नजर आती हैं. निरहुआ, पवन सिंह और आम्रपाली पर काम छीनने के आरोप लगाना और खुद को बेचारी दिखाना अब उबाऊ हो चुका है. दूसरी तरफ, आम्रपाली दुबे पूरे शो की सबसे सुलझी हुई और मजबूत कंटेस्टेंट बनकर उभरी हैं. बिना किसी फालतू ड्रामे और रोने-धोने के उन्होंने अपनी स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी से दिल जीत लिया है. 

हिंदी टीवी स्टार्स का सहारा भी पड़ा फीका
जब भोजपुरी इंडस्ट्री के दिग्गज सितारे ही अपने शो को हिट नहीं करा पाए, तो मेकर्स ने टीआरपी बटोरने के लिए हिंदी टीवी का सहारा लिया. भारती सिंह, कृष्णा अभिषेक और मनीषा रानी की कॉमेडी का तड़का लगाकर शो में एंटरटेनमेंट का डोज डालने की कोशिश की. वहीं जन्नत जुबैर और राधे मां जैसे चेहरों को लाकर व्यूज बटोरने का आखिरी दांव खेला. इन फैक्टर्स ने शो के लिए दवा का काम तो किया, लेकिन इसे एक ब्लॉकबस्टर शो बनाने में नाकाम रहे.

शो पर अंतिम राय
'भोजपुरी बवाल' भारी-भरकम सितारों के नाम पर परोसा गया एक कमजोर ड्रामा है. अगर आप भोजपुरी इंडस्ट्री की गॉसिप और स्टार्स के रोने-धोने के शौकीन हैं, तो यह शो एक बार देखा जा सकता है. लेकिन अगर आप ठोस, मसालेदार और ओरिजिनल एंटरटेनमेंट की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह शो आपको सिर्फ निराशा ही देगा. 

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